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15 लाख करोड़ वापस आए लेकिन कहां गया 3 लाख करोड़ काला धन?

15 लाख करोड़ वापस आए लेकिन कहां गया 3 लाख करोड़ काला धन?

नवंबर 2016 में नोटबंदी लागू...Editor

नवंबर 2016 में नोटबंदी लागू होने के बाद भले ही 500-1000 रुपए के नोट के रूप में 99% करंसी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI)के पास वापस आ गई हो लेकिन इससे काले धन की रकम पर सवाल खड़ा हो गया है. अर्थशास्‍त्री पूछ रहे हैं कि क्‍या काले धन के सरकारी आंकड़े गलत हैं? एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के समय कहा जा रहा था कि इससे 3 लाख करोड़ रुपए का काला धन सामने आ जाएगा. अलबत्‍ता इस कदम से देश की जीडीपी ग्रोथ को 1% का नुकसान हुआ और करीब 15 लाख लोग बेरोजगार हो गए. आरबीआई ने 30 अगस्‍त को एक रिपोर्ट में जानकारी दी है कि करीब 99.3% या 15.3 लाख करोड़ रुपए की करंसी वापस आ गई. अभी 107 अरब रुपए वापस आना बाकी है.

1.5 करोड़ श्रमिक बेरोजगार हुए

नोटबंदी के पहले 15.4 लाख करोड़ रुपए की करंसी बाजार में थी, जो नोटबंदी के बाद बैंकों में 500-1000 रुपए के नोट में वापस आ गई. उधर, संप्रग सरकार में वित्‍त मंत्री रहे पी. चिदंबरम ने ट्वीट किया था कि इस नोटबंदी को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी. उनके मुताबिक विकास के मायनों में जीडीपी को 1.5 फीसदी का नुकसान हुआ. रुपए के टर्म्‍स में यह आंकड़ा 2.25 लाख करोड़ रुपए सालाना बैठता है. 100 से ऊपर लोगों की जान चली गई. 1.5 करोड़ श्रमिक बेरोजगार हो गए. कई छोटे और मझोले उद्योग बंद हो गए. लाखों लोग बेरोजगार हो गए.

डिजिटल ट्रांजेक्‍शन बढ़ा लेकिन किस कीमत पर

नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांजेक्‍शन बढ़ गया लेकिन करंसी का सर्कुलेशन भी 37.7 फीसदी बढ़ गया. द गार्जियन में छपी खबर में अर्थशास्‍त्री गुरुचरन दास ने कहा कि नोटबंदी का फायदा यह हुआ कि जो लोग घरों में नोट रखे बैठे थे वह बैंकों में जमा हो गए. इसमें जो काली कमाई पकड़ी गई उस पर टैक्‍स लगेगा. लेकिन यह तरीका सही नहीं था. इसकी कीमत लोगों को ज्‍यादा चुकानी पड़ी और मेरे अनुमान से आर्थिक प्रगति को तगड़ा धक्‍का लगा है. अगर देश में बेरोजेगारी कम करनी है तो 20 साल तक जीडीपी ग्रोथ 8% रहनी चाहिए.

2018 में 6.6% है विकास दर

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक 2018 में विकास दर 6.6 फीसदी थी. यह चार साल के निम्‍न स्‍तर पर है. मार्च 2018 में यह बढ़कर 7.7% पर आ गई थी. जून 2018 के लिए अनुमान है कि यह 7.6% हो जाएगी.

2016 में स्विस बैंकों में जमा थे 80 करोड़ डॉलर

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जुलाई में संसद में बताया था कि मोदी सरकार के कार्यकाल में 2017 के अंत तक स्विस बैंकों में भारतीयों का धन 80.2 प्रतिशत घटा है. वर्ष 2016 में स्विस बैंकों में भारत के लोगों का पैसा 80 करोड़ डॉलर था जबकि वर्ष 2017 में ये घटकर 52.4 करोड़ डॉलर हो गया.

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