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जस्टिस लोया मामले पर CJI का फाइनल फैसला, जज तय नहीं करेंगे किसे सौंपा जाए केस

जस्टिस लोया मामले पर CJI का फाइनल फैसला, जज तय नहीं करेंगे किसे सौंपा जाए केस

सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने...Editor

सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने न्यायपालिका में चल रही गड़बड़ियों के खिलाफ शुक्रवार को मोर्चा खोल दिया। कई मांगों के बीच जजों ने जस्टिस लोया की मौत को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि ये केस स्पेशल बेंच के हाथों में देने की जरूरत है। दरअसल, इस केस में पीआईएल दाखिल की गई थी और जजों ने मांग करते हुए कहा कि इस केस को सीनियर जजों में दे दिया जाए।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) दीपक मिश्रा ने इस मांग को साफ तौर पर ठुकरा दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक दीपक मिश्रा ने कहा कि अब तक सीजेआई ही ये तय करते हैं कि केस किन हाथों में दिया जाने हैं, ये प्रथा पहले से चलती आ रही है, जिसे वे तोड़ना नहीं चाहते। सीजेआई के ऑफिस की तरफ से कहा गया था कि पूर्व सीजेआई जस्टिस एच एल दत्तू, टीएस ठाकुर, जेएस खेहर के फैसलों पर ही केस बेंचों को दिए जाते थे।
इसके बाद चारों जजों की ओर से सीजेआई को लेटर लिखा गया और विरोध जताया। लेटर में कहा गया कि सीजेआई को ये अधिकार है कि वे केस किस बेंच के हाथों में देना चाहते हैं, लेकिन लेकिन उनके सहयोगियों पर सीजीआई के किसी भी अधिकार, कानूनी या तथ्यात्मक की मान्यता नहीं है।
सीजेआई को बराबरी का माहौल बना कर रखना चाहिए। इसके जवाब में सीजेआई की तरफ से कहा गया कि जब आप अपने जूनियर्स को बराबर मानते हैं तो इस आपत्ति का कोई मतलब नहीं बनता।बता दें कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट से 25 जजों में से 10वें नंबर पर आने वाले जज को सौंपा गया है और सीनियर जजों ने इस पर आपत्ति जताई है।
जस्टिस लोया की मौत पर उठे सवाल
बता दें कि जज लोया 1 दिसंबर, 2014 को नागपुर में अपने सहकर्मी की बेटी की शादी में शामिल होने गए थे। वहीं हार्ट अटैक के कारण उनकी मृत्यु हुई थी। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब पिछले साल नवंबर में लोया की बहन ने इसे सोहराबुद्दीन केस से जोड़ते हुए उनकी मौत की परिस्थितियों पर शक जाहिर किया।
गुजरात में 2005 में सोहराबुद्दीन शेख, उसकी बीवी कौसर बी और उसके दोस्त तुलसीराम प्रजापति की तथाकथित फर्जी मुठभेड़ में मौत के मामले में पुलिस अधिकारियों समेत 23 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही है। इस मामले को बाद में सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया और केस की सुनवाई भी मुंबई शिफ्ट कर दी गई थी।

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