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खुद सीएम योगी ने खोला राज, क्यों बना इलाहबाद प्रयागराज

खुद सीएम योगी ने खोला राज, क्यों बना इलाहबाद प्रयागराज

लखनऊ. आखिरकार, सीए...Public Khabar

लखनऊ. आखिरकार, सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद ही इलाहबाद को प्रयागराज किए जाने के अपने फैसले के पीछे के कारण को उजागर कर दिया. सीएम योगी ने शनिवार शाम राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 'हिन्दुस्तान' अखबार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के विकास, योजनाओं, धर्म, खेती-किसानी और राजनीति पर खुलकर चर्चा की.


उन्होंने इसी मंच से पहली बार यह भी बताया किसरकार को इलाहाबाद को वापस उसकी पौराणिक पहचान क्यों देनी पड़ी. उन्होंने कहा कि इलाहाबाद जब तक था, तब तक लोग इसे आम नजर से देखते थे. प्रयागराज हुआ तो देश-दुनिया में कौतुहल सा माहौल हो गया.


उन्होंने कुंभ में आने वाले तीर्थयात्रियों के आंकड़ों के हवाले से बताया कि नाम बदलने का असर कुंभ 2019 में साफ देखने को मिला. इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने के बाद कुंभ को भी अलग पहचान मिली. कुंभ के अवसर पर 24 करोड़ से ज्यादा लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई. 44 करोड़ की संख्या में लोग प्रयागराज आए. 70 देशों के 3200 अप्रवासी भारतीयों ने भी कुंभ में स्नान किया. जब नाम इलाहाबाद था तो सभी कुंभ को सामान्य आयोजन की तरह देखते थे. लेकिन, जब प्रयागराज नाम दिया गया तो यह पूरी दुनिया में कौतूहल का विषय बना.


सीएम योगी ने अयोध्या विवाद पर सवाल पूछे जाने पर बेबाकी से जवाब दिया कि यह हम नहीं दुनिया कहती है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ. अगर मध्यस्थता से अयोध्या विवाद का समाधान होता है तो सबसे पहले मैं उसका स्वागत करता हूं. विवाद को खत्म करने के लिए लगातार मध्यस्थता का प्रयास हुआ. 1986 से 1989 कई बार मध्यस्थता का प्रयास किया गया. इलाहाबाद की विशेष खंडपीठ जो फैसला करेगी हम मानेंगे, यह मुस्लिम पक्ष कहता था. लेकिन, सबसे पहले उन्होंने ही इसका विरोध किया.


उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय टीम गठित की है. अगर सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि इससे समाधान निकलेगा तो अच्छी बात है. लेकिन दुनिया जानती है कि यह आस्था का सवाल है. मंदिर बहुत बनेंगे. लेकिन जहां राम जन्मभूमि है वहीं रामलला का मंदिर बनेगा. आस्था का सम्मान होना चाहिए.


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