Top
Home > मुख्य समाचार > सावधान यूरोप की ये बीमारी पहुंच चुकी है यूपी

सावधान यूरोप की ये बीमारी पहुंच चुकी है यूपी

सावधान यूरोप की ये बीमारी पहुंच चुकी है यूपी

PublicKhabar.com ...Public Khabar

PublicKhabar.com

जो बीमारी अबतक सिर्फ यूरोप क देशों में पाई हाती थी, उसने उत्तर प्रदेश में भी दस्तक दे दी है। डेनमार्क और स्कॉटलैंड की बीमारी 'डेरियर' के लक्ष्ण अब कानपुर में पाए गए हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज स्थित लाला लाजपत राय चिकित्सालय (हैलट) के पैथोलॉजी विभाग के शोध में यह खुलासा हुआ है। देशभर में अब तक इस बीमारी के 15 मरीज मिले हैं, जिनमें यूपी में कानपुर का यह पहला मामला सामने आने पर विशेषज्ञ हैरत में हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब एक 20 वर्षीय युवती हैलट अस्पताल में शरीर पर लाल चकत्तों का इलाज कराने पहुंची।
तीस दिनों तक शोध में जीएसवीएम के डॉक्टरों ने पाया कि यह सामान्य चर्म रोग नहीं बल्कि 'डेरियर' है। स्किन कैंसर की आशंका में डेरियर की पहचान गोविंदनगर निवासी युवती के शरीर पर लाल-काले चकत्तों के साथ दाने निकले हुए थे। उसके परिजनों ने मेडिकल कॉलेज की स्किन रोग ओपीडी में दिखाया तो स्किन कैंसर की आशंका जताते हुए डॉक्टरों ने उसे सर्जरी विभाग रेफर कर दिया। विभाग ने बायोप्सी जांच के लिए उसे सुझाव दिया। हैलट अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग ने बायोप्सी की लेकिन कैंसर की पुष्टि नहीं हुई तो डायग्नोसिस शुरू की गई।
पैथोलॉजी की रिपोर्ट को सौ से अधिक आनुवंशिक चर्म रोगों के लक्षणों से मिलान किया गया तो डेरियर बीमारी के लक्षण पाए गए। पैथोलॉजी में हो रहे विश्व स्तर पर शोध को छापने वाली पत्रिका ने जीएसवीएम के इस शोध को स्वीकार कर लिया है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों के मुताबिक डेरियर के मरीज डेनमार्क, स्कॉटलैंड, नार्थ ईस्ट इंग्लैंड और स्लोवानिया में पाए जाते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक डेरिया सोरिएसिस, इक्थिआसिस और केराटोसिस से ज्यादा खतरनाक बीमारी है। इसमें सीने, गर्दन, पीठ, पेट और कान के निकट काले और लाल दाने निकलते हैं। दाने कभी-कभी फफोलों में बदल जाते हैं और धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाते हैं। डेरियर चर्म रोग की आनुवांशिक बीमारी है। माता-पिता में से किसी एक में यह बीमारी होगी तो पीढ़ी में स्थानांतरित होगी। 1
5 से 16 वर्ष आयु तक बीमारी नहीं दिखती, लेकिन 16 और 30 वर्ष तक बीमारी अचानक उभरती है। यह जीवनभर रहती है।
लक्ष्ण
- सोरिएसिस- श्वेत रूसी छोड़नेवाले लाल चकत्ते पड़ जाते हैं।
- इक्थिआसिस- त्वचा में मछली के छिलकों की तरह पपड़ी पड़ जाती है।
- केराटोसिस- त्वचा सींग के समान कड़ी हो जाती है और परत उखड़ने लगती है।
- इस बीमारी पर अभी विश्वभर में शोध हो रहे हैं। अभी तक इसका इलाज नहीं खोजा जा सका है।
युवती के खून की जांच से डेरियर बीमारी का पता चला। युवती के पिता को भी ऐसी बीमारी थी। -प्रो. महेन्द्र सिंह, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

Tags:    
Share it
Top