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अफ़सोस कि अब कभी पूरी न होगी गिरिजा देवी की ये हसरत

अफ़सोस कि अब कभी पूरी न होगी गिरिजा देवी की ये हसरत

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गिरिजा देवी अप्पा जी के निधन के साथ ही उनका एक ख्वाब अधूरा रह गया. सुरों की साधिका, ठुमरी की रानी कही जाने वाली गिरिजा देवी की बनारस में गंगा की लहरों पर आशा भोसले के साथ युगल गायन करने की तमन्ना अधूरी ही रह गई. इसी साल अप्रैल महीने में 43 दिवसीय सुरगंगा महोत्सव के उद्घाटन सत्र में उन्होंने मंच पर सार्वजनिक रूप से अपनी यह इच्छा जाहिर की थी. उनकी इस ख्वाहिश पर आशा भोसले ने कहा था यह मेरा सौभाग्य होगा कि मुझे आप के साथ गाने का मौका मिलेगा.

गिरिजा देवी ने इसी महीने की 11 तारीख को बनारस से कोलकाता जाने से पहले अपने भतीजे प्रकाश सिंह के सामने कई इच्छाएं व्यक्त की थीं.उन्होंने कहा था कि 10 नवंबर को आऊंगी तो पांच-छह दिन तुम लोगों के साथ रहूंगी.परिवार के सदस्यों के साथ कुछ समय बिताने की इच्छा है.10 नवंबर को उन्हें बनारस में इनरव्हील क्लब के एक कार्यक्रम में शिरकत करना था.इसके एक सप्ताह बाद उनका दिल्ली जाने का कार्यक्रम था जहां दो दिन ठहरने के बाद वह जयपुर में होने वाले विश्वविख्यात संगीत समारोह में गायन करने जाने वाली थीं.

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