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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पीएनबी घोटाले का एक गर्म मुद्दा हाथ लग गया है

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पीएनबी घोटाले का एक गर्म मुद्दा हाथ लग गया है

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वैसे...Editor

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वैसे तो अक्सर किसी न किसी बहाने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का विरोध करती रही हैंं। लेकिन इस बार उन्हें सरकारी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 11400 करोड़ रुपये घोटाले का एक गर्म मुद्दा हाथ लग गया है। जाहिर है वह इस साल के मध्य में होनेवाले पंचायत चुनाव और अगले साल होनेवाले लोकसभा चुनाव के पहले इसे अहम मुद्दा बनाने से नहीं चुकेंगी। उन्होंने इसका संकेत भी दिया है। पीएनबी में घोटाले का हवाला देते हुए अब वह प्रस्तावित वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा (एफआरडीआइ) विधेयक को रद कराने की मांग पर अड़ गई हैं। उन्होंने सरकारी बैंकों में आम जनता का पैसा सुरक्षित रहने पर सवाल उठाया है। उन्होंने पीएनबी घोटाले का हवाला देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली को पत्र लिखकर प्रस्तावित एफआरडीआइ विधेयक रद करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा है कि पीएनबी में घोटाले से शिक्षा लेकर प्रस्तावित एफआरडीआइ विधेयक रद किया जाना चाहिए। ममता ने पत्र में यह साफ किया है कि केंद्र अविलंब एफआरडीआइ विधेयक वापस नहीं लेता है तो वह इसे लेकर व्यापक आंदोलन पर उतरेंगी।

पीएनबी में घोटाले पर भी ममता ने सख्त रुख अख्तियार करने की बात कही है। उनका कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच से इसकी सच्चाई सामने नहीं आती है तब तक वह चुप नहीं बैठेंगी। जाहिर है ममता को प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध एक मुद्दा हाथ लगा है जिसे वह चुनाव से पहले राजनीतिक हथियार बनाने से नहीं चुकेंगी।
कोई भी बड़ा घोटाला भले ही अचानक उजागर होता है लेकिन उसकी बुनियाद एक दिन में तैयार नहीं होती। जैसा कि भाजपा का कहना है कि इसका आधार यूपीए सरकार के समय तैयार हुआ है जबकि मोदी सरकार तो कार्रवाई कर रही है। सच्चाई क्या है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है यह तो जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन इस मुद्दे पर ममता केंद्र की मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करने के लिए आमदा हैं। इसी बहाने वह प्रस्तावित एफआरडीआइ विधेयक को रद कराने की मांग पर अड़ गई है। स्वभाविक है अब कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल भी इस पर मुखर होंगे, लेकिन एफआरडीआइ विधेयक रद करने को लेकर विपक्ष एकजुट होता है तो उसका नेतृत्व भी ममता करना चाहेंगी। इसलिए सबसे पहले उन्हें इसे रद करने को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिख दिया है।

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