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दिल्ली की सियासत में इन दिनों आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन की चर्चा उफान पर है

दिल्ली की सियासत में इन दिनों आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन की चर्चा उफान पर है

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दिल्ली की सियासत में इन दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन की चर्चा उफान पर है। यह अलग बात है कि शुक्रवार को AAP ने छह लोकसभा उम्मीदवारों की घोषणा करने के साथ- साथ यह भी स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि अब कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा। वहीं, हैरानी की बात है कि पश्चिमी दिल्ली की सीट खाली छोड़कर आम आदमी पार्टी ने कहीं न कहीं संभावनाएं खुली भी रखी हैं। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी साफ शब्दों में न तो ना कहा है और न ही हां। इन हालातों में क्या होगा आने वाले दिनों में, दोनों पार्टियां आपस में हाथ मिलाएंगी या नहीं, सीटों के बंटवारे को लेकर क्या गणित रहेगा आदि सवालों पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) के महासचिव और दिल्ली कांग्रेस के प्रभारी पीसी चाको दैनिक जागरण से खुलकर बात की।

लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर दिल्ली में गठबंधन की स्थिति पर उन्होंने कहा कि अभी तक कुछ भी तय नहीं है। गठबंधन होगा या नहीं और कब तक होगा, बताना बहुत ही मुश्किल है। वहीं, अगर गठबंधन हुआ तो सीटों के बंटवारे का फॉर्मूले क्या रहेगा? इस पर पीसी चाको ने कहा कि इस सवाल का जवाब भी गठबंधन होने या न होने की स्थिति से ही जुड़ा हुआ है। अगर गठबंधन हुआ तो सीटों के बंटवारे के लिए कई फॉर्मूले हैं।

यह पूछने पर कि गठबंधन प्रदेश कांग्रेस नहीं बल्कि एआइसीसी चाहती है? तो उन्होंने कहा कि एआइसीसी ने केंद्रीय स्तर पर यह निर्णय लिया है कि नरेंद्र मोदी सरकार को हराने के लिए राष्ट्रीय और राज्य दोनों ही स्तरों पर भाजपा विरोधी पार्टियों के साथ गठबंधन किया जाए। इस दिशा में देश भर की प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को भी अपने स्तर पर संभावनाएं तलाशने के स्पष्ट निर्देश हैं। दिल्ली भी इससे अलग नहीं है। लेकिन, गठबंधन करना है या नहीं और किसके साथ करना है, इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी का निर्णय भी बहुत मायने रखता है।

AAP से गठबंधन पर पार्टी को विधानसभा चुनाव में नुकसान होगा। इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीसी चाको का कहना है कि यह कहना इतना आसान नहीं है। इस स्थिति पर ज्यादा बेहतर रिपोर्ट जिला और ब्लॉक कमेटी दे सकती है क्योंकि इन्हीं कमेटियों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर आम जनता के साथ जुड़े होते हैं।

आम आदमी पार्टी द्वारा छह उम्मीदवार घोषित करने और कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करने के बयान पर उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी का ही विचार था कि कांग्रेस के साथ गठबंधन से भाजपा को हराने में मदद मिलेगी। लेकिन अब उन्होंने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए। हो सकता है कि इस घोषणा के पीछे राजनीतिक कारण रहे हों। वैसे इसे दबाव की राजनीति के रूप में भी देखा जा सकता है।

कांग्रेस अपने स्तर पर लोकसभा चुनाव के लिए तैयार

कांग्रेस नेता ने कहा कि 14 जिला अध्यक्ष बनाने के बाद दिल्ली कांग्रेस ने 280 ब्लॉक कमेटियां भी बना ली हैं और 13 हजार बूथ कमेटियां भी बनाई जा चुकी हैं। हर बूथ कमेटी को भी तीन तीन, चार चार स्कवॉयड में बांटने की योजना है ताकि ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंचा जा सके। इसके अतिरिक्त लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ही विभिन्न पांच कमेटियों का गठन भी कर दिया गया है जिन्होंने अपना काम शुरू कर दिया है।

कब होंगे कांग्रेस के उम्मीदवार कब तक घोषित

दिल्ली की सात सीटों के लिए 70 से अधिक आवेदन आए हुए हैं। एक बार चुनाव समिति की बैठक भी हो चुकी है। जल्द ही स्क्रीनिंग कमेटी में सभी आवेदनों पर विचार किया जाएगा। चुनाव अधिसूचना जारी होने के आसपास ही सभी उम्मीदवार भी घोषित कर दिए जाएंगे।

महिला उम्मीदवारों को मिलेगी प्राथमिकता

उम्मीदवार चयन के लिए पार्टी ने तीन सूत्रीय फॉर्मूला रखा है। जाति समीकरण, युवा और नया चेहरा तथा जीतने की संभावनाएं। महिला उम्मीदवारों को भी कुछ हद तक प्राथमिकता मिलेगी। पुराने चेहरों पर भी विचार होगा, लेकिन सबसे अधिक प्राथमिकता उसी चेहरे या नाम को दी जाएगी जिसकी जीत को लेकर पार्टी सर्वाधिक आश्वस्त होगी।

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