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निकाय चुनाव 2018: कोई नहीं बेफ्रिक, सबका है पहला इम्तिहान

निकाय चुनाव 2018: कोई नहीं बेफ्रिक, सबका है पहला इम्तिहान

नगर निकायों में चुनाव का बिगुल ...Editor

नगर निकायों में चुनाव का बिगुल बज चुका है। सियासी हलचल हर पल बढ़ रही है। जिन्हें सीधे तौर पर चुनावी दंगल में उतरना है, वह तैयारियों में जुट गए हैं। नई भूमिका में पहली बार चुनावी चुनौती का सामना करने वाले कई दिग्गज भी सामने हैं। ये वो दिग्गज हैं, जिनके लिए निकाय चुनाव कहीं न कहीं उनकी प्रतिष्ठा से जुड़ा मसला होगा। चाहे फिर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत हों, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट हों या फिर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह। इस फेहरिस्त में एक गैर सियासी नाम और जुड़ा है। वो है राज्य निर्वाचन आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट का। अपने अपने कार्य क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए इन दिग्गजों की सिर्फ एक ही कोशिश निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की होगी। सियासी दिग्गजों के लिए निकाय चुनाव का संग्राम इसलिए भी बेहद अहम है, क्योंकि लोकसभा चुनाव से पहले जनता की नब्ज टटोलने का ये एक शानदार मौका है।

त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री

-लंबा राजनीतिक और सांगठनिक अनुभव है। कई नगर निकाय चुनाव देखे हैं और लड़वाए भी हैं। मगर बड़ी सरकार के मुखिया रहते हुए 'मिनी सरकार' के चुनाव की पहली बार चुनौती से दो-चार हैं। करीब डेढ़ साल पहले सत्ता संभालने वाले त्रिवेंद्र सिंह रावत भले ही थराली उपचुनाव से जुड़ी परीक्षा में पास रहे हों, लेकिन उनके कार्यकाल का यह पहला चुनाव है, जिसका दायरा पूरे प्रदेश में फैला है। लोकसभा चुनाव से पहले इस चुनाव के नतीजे मुख्यमंत्री के लिए खासे मायने रखते हैं।

अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा

-भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बतौर अजय भट्ट का कार्यकाल तीन साल का होने जा रहा है। इस दौरान 2016 का सत्ता संग्राम भी भाजपा संगठन ने उनकी अगुवाई में देखा। विधानसभा चुनाव में वह भले ही रानीखेत सीट हार गए, लेकिन अध्यक्ष बतौर प्रचंड बहुमत का स्वाद भी उन्हें चखने को मिला। लोकसभा चुनाव को देखते हुए उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा है। इससे पहले, नगर निकाय चुनाव में उन्हें अपने सांगठनिक हुनर का प्रदर्शन करना है। चुनाव उनका इम्तिहान है।

प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस

-कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में प्रीतम सिंह का करीब सवा साल का कार्यकाल अभी तक रहा है। धीरे-धीरे वह संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करते दिख रहे हैं। थराली उपचुनाव में कांग्रेस भले ही हारी, लेकिन उसने भाजपा को कड़ी टक्कर दी। निकाय चुनाव में कांग्रेस के सामने बेहतर प्रदर्शन की चुनौती है। चूंकि कांग्रेस का राज्य में प्रीतम नेतृत्व कर रहे हैं, इसलिए कसौटी पर उनकी सांगठनिक क्षमता और योग्यता दोनों ही होगी। कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन करती है, तो श्रेय के वही प्रमुख हकदार होंगे।

चंद्रशेखर भट्ट, राज्य निर्वाचन आयुक्त

-पूर्व आईएएस अफसर चंद्रशेखर भट्ट कई कुमाऊं कमिश्नर और सचिव तक रहे हैं। लंबा प्रशासनिक अनुभव उनके साथ जुड़ा है। लोस और विस चुनावों का अनुभव भी उनके पास है। लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग में आयुक्त बतौर उन्हें अभी सिर्फ साढे़ तीन महीने हुए हैं। अब 84 नगर निकायों में चुनाव का बड़ा लक्ष्य उनके सामने है। नगर निकाय चुनाव के साथ पिछले कुछ महीनों में जिस तरह से तमाम तरह की तकनीकी पेचीदगी जुड़ी है, उसमें सफलतापूर्वक आयोजन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

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