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ISRO ने अंतरिक्ष में रचा इतिहास, EMISAT का सन सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

ISRO ने अंतरिक्ष में रचा इतिहास, EMISAT का सन सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

इसरो ने अंतरिक्ष में इतिहास...Editor

इसरो ने अंतरिक्ष में इतिहास रच दिया है। पीएसएलवी C-45 ने इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सैटेलाइट एमिसैट को सन सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया है। अब पीएसएलवी C45 अन्य 28 सैटलाइट्स को प्रक्षेपित करने के लिए आगे बढ़ चुका है। इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस उपग्रह एमिसैट को पीएसएलवी C-45 से इसरो ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्‍च किया।

बता दें कि इसरो का यह पहला ऐसा मिशन है, जो तीन अलग-अलग कक्षाओं में सैटेलाइट्स को स्थापित करेगा। पीएसएलवी C-45 के जरिए जो सैटेलाइट्स लॉन्च किए गई हैं, उनमें सबसे महत्वपूर्ण है EMISAT यानी इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सैटेलाइट है। यह डीआरडीओ को डिफेंस रिसर्च में मदद करेगा। एमिसैट उपग्रह का मकसद विद्युत चुंबकीय माप लेना है।इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नायर ने कहा कि PSLVC45 इसरो के लिए बहुत महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल हमारे अपने सेटेलाइट बल्कि अन्य देशों के भी लॉन्च करने जा रहा है।

इस मिशन की विशिष्टता है कि यह सेटेलाइट्स को 3 अलग-अलग कक्षाओं में रखने जा रहा है। मुझे उम्मीद है कि यह हमेशा की तरह सौ फीसद सफल रहेगा।इसरो के मुताबिक अबकी बार लांच के लिए चार स्ट्रैप ऑन मोटर्स से लैस पीएसएलवी-क्यूएल संस्करण का उपयोग किया जा रहा है। पीएसएलवी का उपयोग भारत के दो प्रमुख मिशनों में किया जा चुका है। 2008 में चंद्रयान में और 2013 में मंगल मिशन में।एमिसैट के अलावा इसरो ने रॉकेट के जरिए दूसरे देशों के भी 28 सैटेलाइट्स को भी लॉन्च किया है। इनमें अमेरिका के 24, लिथुआनिया का 1, स्पेन का 1 और स्विट्जरलैंड का 1 सैटलाइट शामिल हैं।इससे पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि प्रक्षेपण की उल्‍टी गिनती सुबह छह बजकर 27 मिनट पर शुरू हो गई थी। एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि चार चरणों वाला पीएसएलवी-सी45 श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लांच पैड से सोमवार सुबह नौ बजकर 27 मिनट पर प्रक्षेपित किया जाएगा।गौरतलब है कि इसरो के अध्यक्ष के. सिवान ने पहले कहा था, 'यह हमारे लिए विशेष मिशन है। हम चार स्ट्रैप ऑन मोटर्स के साथ एक पीएसएलवी रॉकेट का इस्तेमाल करेंगे। इसके अलावा पहली बार हम तीन अलग-अलग ऊंचाई पर रॉकेट के जरिए ऑर्बिट में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।'

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