पुत्रदा एकादशी 2025, संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि के लिए शुभ व्रत
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सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और इनमें से पुत्रदा एकादशी को संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्रत न केवल संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए फलदायी होता है, बल्कि पारिवारिक कल्याण और सुख-शांति की कामना के लिए भी रखा जाता है। आइए जानते हैं कि साल 2025 की पहली पुत्रदा एकादशी कब है और इसका महत्व क्या है।
पुत्रदा एकादशी 2025: तिथि और समय
●साल 2025 की पहली पुत्रदा एकादशी 9 जनवरी से 10 जनवरी तक पड़ रही है।
●एकादशी तिथि प्रारंभ: 9 जनवरी 2025, सुबह 6:23 बजे
●एकादशी तिथि समाप्त: 10 जनवरी 2025, सुबह 7:50 बजे
धर्मशास्त्रों के अनुसार, व्रत की पूजन विधि और पारण समय विशेष महत्व रखता है। व्रत का पारण 10 जनवरी को सुबह उचित समय पर किया जाएगा।
पुत्रदा एकादशी का महत्व
1. संतान सुख की प्राप्ति:
इस व्रत को रखने से उन दंपतियों को विशेष फल मिलता है जो संतान की प्राप्ति की कामना करते हैं। यह व्रत न केवल शारीरिक बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी संतान के लिए शुभकारी माना जाता है।
2. पारिवारिक खुशहाली:
पुत्रदा एकादशी का पालन करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है। यह व्रत परिवार के सभी सदस्यों के कल्याण के लिए किया जा सकता है।
3. पुण्य की प्राप्ति:
शास्त्रों के अनुसार, पुत्रदा एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति को पुण्यफल की प्राप्ति होती है और यह व्रत पितृ दोष को समाप्त करने में सहायक होता है।
व्रत रखने की विधि
एक दिन पहले से तैयारी:
दशमी तिथि की शाम को सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
प्रातःकाल स्नान और संकल्प:
एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की पूजा करें।
पूजा सामग्री:
तुलसी के पत्ते, पीले फूल, चंदन, दीपक, धूप, और पंचामृत का उपयोग करें।
भगवान विष्णु की कथा और आरती:
व्रत के दौरान भगवान विष्णु की कथा पढ़ें या सुनें और उनकी आरती करें।
दान-पुण्य:
व्रत के दिन गरीबों और ब्राह्मणों को दान करना शुभ माना जाता है।
पुत्रदा एकादशी की पौराणिक कथा
पुत्रदा एकादशी से जुड़ी कथा के अनुसार, महिष्मति नगर के राजा सुकेतु और रानी शैव्या के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने इस व्रत का पालन किया और भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें एक योग्य पुत्र की प्राप्ति हुई। यह कथा दर्शाती है कि भगवान विष्णु की भक्ति और व्रत के फलस्वरूप संतान सुख प्राप्त किया जा सकता है।
व्रत पारण का महत्व
व्रत का पारण 10 जनवरी को सूर्योदय के बाद उचित समय पर किया जाएगा। व्रत के समापन के लिए पारण का सही समय जानना महत्वपूर्ण है।
पुत्रदा एकादशी 2025, पारिवारिक कल्याण और संतान सुख के लिए एक अत्यंत शुभ अवसर है। यह व्रत न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ाता है, बल्कि परिवार में सकारात्मकता और शांति का संचार भी करता है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए इस व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करें।
यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।