2025 में लगेंगे 4 ग्रहण, जानिए सूर्य और चंद्र ग्रहण की तारीखें और भारत पर प्रभाव
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2025 का वर्ष खगोलीय घटनाओं के लिहाज से खास रहने वाला है, क्योंकि इस साल कुल चार ग्रहण लगने जा रहे हैं। इनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। ग्रहण केवल खगोलीय घटनाएं नहीं हैं, बल्कि ये ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। आइए जानते हैं कि ये ग्रहण कब-कब होंगे और इनका भारत सहित विश्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
2025 में ग्रहणों की तारीखें
1. पहला सूर्य ग्रहण:
तारीख: 29 मार्च 2025
प्रकार: आंशिक सूर्य ग्रहण
स्थान: यह ग्रहण भारत सहित एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।
2. पहला चंद्र ग्रहण:
तारीख: 14 अप्रैल 2025
प्रकार: पूर्ण चंद्र ग्रहण
स्थान: यह भारत में पूरी तरह से दिखाई देगा और इसे नग्न आंखों से देखा जा सकेगा।
3. दूसरा सूर्य ग्रहण:
तारीख: 23 सितंबर 2025
प्रकार: आंशिक सूर्य ग्रहण
स्थान: यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका और एशिया के कुछ हिस्सों में दिखेगा। हालांकि, भारत में इसे नहीं देखा जा सकेगा।
4. दूसरा चंद्र ग्रहण:
तारीख: 8 अक्टूबर 2025
प्रकार: आंशिक चंद्र ग्रहण
स्थान: यह ग्रहण भारत सहित एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में दिखाई देगा।
भारत पर ग्रहणों का प्रभाव
ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण का प्रभाव मानव जीवन, प्रकृति और समाज पर पड़ता है। आइए जानते हैं कि इन ग्रहणों का भारत पर क्या प्रभाव हो सकता है:
1. सूर्य ग्रहण का प्रभाव:
सूर्य ग्रहण का प्रभाव आर्थिक मामलों, राजनीति और स्वास्थ्य पर देखा जा सकता है। यह समय देश के लिए नई नीतियों के निर्माण का हो सकता है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं की संभावना बढ़ सकती है।
2. चंद्र ग्रहण का प्रभाव:
चंद्र ग्रहण का प्रभाव भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक पड़ता है। भारत में यह ग्रहण सामाजिक और पारिवारिक संबंधों पर असर डाल सकता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चंद्र ग्रहण के दौरान शांति और संयम बनाए रखना फायदेमंद रहेगा।
ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?
1. ग्रहण के समय किसी भी प्रकार के शुभ कार्य करने से बचें।
2. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और घर की साफ-सफाई करें।
3. इस समय धार्मिक ग्रंथों का पाठ और मंत्रोच्चारण करना शुभ माना जाता है।
4. गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।
ग्रहण के वैज्ञानिक पहलू
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण का प्रभाव पृथ्वी के पर्यावरण, मौसम और ज्वार-भाटे पर देखा जा सकता है। सूर्य ग्रहण के दौरान सूरज की रोशनी में कमी आती है, जबकि चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का रंग तांबे जैसा हो जाता है। ये घटनाएं खगोल विज्ञान के अध्ययन के लिए बेहद रोचक और महत्वपूर्ण होती हैं।
2025 में लगने वाले चार ग्रहण न केवल खगोलीय घटनाओं के रूप में महत्वपूर्ण होंगे, बल्कि इनका धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक महत्व भी रहेगा। ग्रहण के दौरान सही उपाय और जागरूकता से इसका प्रभाव कम किया जा सकता है।
यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।