चैत्र नवरात्रि 2025 मां कात्यायनी की पूजा से दूर होंगी बाधाएं, ऐसे करें व्रत और मंत्र जाप

चैत्र नवरात्रि 2025 मां कात्यायनी की पूजा से दूर होंगी बाधाएं, ऐसे करें व्रत और मंत्र जाप
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चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना का विशेष महत्व होता है। इन्हें शक्ति और पराक्रम की देवी माना जाता है। मां कात्यायनी की उपासना से भय, शत्रु बाधाओं और विवाह में आ रही अड़चनों से मुक्ति मिलती है। जो लोग अपने जीवन में शुभता, सफलता और वैवाहिक सुख चाहते हैं, उनके लिए इस दिन मां कात्यायनी की पूजा अत्यंत फलदायी होती है।

मां कात्यायनी को महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने असुरों का संहार कर धर्म की रक्षा की थी। इनकी आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और विशेष रूप से अविवाहित कन्याओं के विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। यदि आप भी मां कात्यायनी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस दिन सही विधि से पूजन, मंत्र जाप और व्रत नियमों का पालन अवश्य करें। आइए जानते हैं मां कात्यायनी की पूजा विधि, व्रत के नियम और उनका महत्व।

मां कात्यायनी की पूजा विधि

मां कात्यायनी की पूजा विधि बहुत ही सरल और प्रभावी होती है। इस दिन भक्तों को विशेष रूप से मां को प्रसन्न करने के लिए विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए।

✅ सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

✅ मां कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से शुद्ध करें और चौकी पर विराजित करें।

✅ मां को पीले या लाल फूल, अक्षत, रोली, चंदन और कुमकुम अर्पित करें।

✅ भोग में शहद और गुड़ का विशेष महत्व है, इसे अर्पित करें।

✅ मां कात्यायनी की आरती करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

✅ यदि संभव हो तो इस दिन ब्राह्मण कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें वस्त्र भेंट करें।

मां कात्यायनी का मंत्र और जाप विधि

मंत्र जाप से मां कात्यायनी की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। इस दिन निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

🔹 मां कात्यायनी बीज मंत्र:

“ॐ ह्रीं कात्यायन्यै स्वाहा।”

🔹 मां कात्यायनी का मुख्य मंत्र:

“चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥”

✅ इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

✅ माला से जाप करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।

✅ मंत्र जाप के दौरान दीपक प्रज्वलित रखें और मानसिक रूप से मां का ध्यान करें।

मां कात्यायनी व्रत के नियम

नवरात्रि के छठे दिन व्रत रखने से विशेष लाभ मिलता है। इस दिन व्रत रखने के कुछ नियम इस प्रकार हैं:

✅ व्रतधारी को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।

✅ नमक रहित भोजन या केवल फलाहार ग्रहण करें।

✅ दिनभर उपवास रखकर संध्या के समय मां कात्यायनी की आरती करें और भोग अर्पित करें।

✅ यदि कोई व्यक्ति निराहार व्रत नहीं रख सकता, तो फलाहार या दूध का सेवन कर सकता है।

✅ इस दिन क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से बचें।

मां कात्यायनी की कृपा से मिलते हैं ये लाभ

✅ विवाह में आ रही अड़चनों से मुक्ति मिलती है।

✅ सफलता और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।

✅ नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।

✅ मन को शांति और आत्मबल प्राप्त होता है।

✅ विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों को सफलता मिलती है।

चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा से विशेष कृपा प्राप्त होती है। जो लोग अपने जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता चाहते हैं, उन्हें इस दिन मां कात्यायनी की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। यदि विवाह में बाधाएं आ रही हैं, तो इस दिन व्रत और मंत्र जाप करने से सभी अड़चनें समाप्त हो जाती हैं। मां कात्यायनी की कृपा से जीवन के सभी कष्टों का नाश होता है और भक्तों को मनचाही सफलता प्राप्त होती है।

यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।

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