कामदा एकादशी 2025: 8 अप्रैल को रखा जाएगा शुभ व्रत, जानें तिथि, पारण मुहूर्त और धार्मिक महत्व

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कामदा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से इच्छाओं की पूर्ति, पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से सभी सांसारिक और आत्मिक इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
कामदा एकादशी का उल्लेख पुराणों में भी विस्तारपूर्वक किया गया है। इसके पीछे की कथा बताती है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति पूर्व जन्मों के पापों से भी मुक्त हो सकता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे बहुत ही शुद्ध भाव से करने का विधान है।
कामदा एकादशी 2025: व्रत की तिथि और शुभ समय
पंचांग के अनुसार, कामदा एकादशी 2025 में 8 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जाएगी।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 7 अप्रैल 2025 को रात 8:00 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 8 अप्रैल 2025 को रात 9:12 बजे
👉 इस बार एकादशी का व्रत 8 अप्रैल को रखा जाएगा, क्योंकि उदयकालीन तिथि इसी दिन है।
व्रत पारण (व्रत खोलने का समय):
तिथि: 9 अप्रैल 2025, बुधवार
शुभ मुहूर्त: सुबह 6:26 से 8:56 तक
कामदा एकादशी व्रत का महत्व
कामदा एकादशी का नाम ही उसके प्रभाव को स्पष्ट करता है – ‘काम’ यानी इच्छाएं और ‘दा’ यानी देने वाली। इस दिन का व्रत करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है, विशेषकर दांपत्य जीवन, संतान सुख, रोग मुक्ति और अध्यात्मिक उन्नति के लिए यह व्रत चमत्कारी माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति इस एकादशी को श्रद्धा से व्रत करता है, उसे पुण्यलोक की प्राप्ति होती है। साथ ही अगर वह किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए यह व्रत करता है, तो उसे निश्चित रूप से सफलता मिलती है।
कामदा एकादशी की व्रत विधि (पूजा प्रक्रिया)
. प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु का ध्यान करें।
. घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
. पीले फूल, तुलसी पत्र, चावल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
. विष्णु सहस्त्रनाम, गीता पाठ या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
. रात्रि को जागरण करें और भजन-कीर्तन में भाग लें।
. अगले दिन पारण के शुभ समय पर व्रत खोलें। फलाहार या अन्न का सेवन पारण के बाद करें।
कामदा एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा संक्षेप में
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार रत्नपुर राज्य के गंधर्व संगीतकार ललित और उसकी पत्नी ललिता पर एक श्राप लग गया था, जिससे ललित राक्षस बन गया। अपनी पत्नी के दुख से व्याकुल ललिता ने मुनि शृंगी के मार्गदर्शन में कामदा एकादशी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से ललित को श्राप से मुक्ति मिली और वह पुनः गंधर्व रूप में लौट आया।
यह कथा दर्शाती है कि यह व्रत न केवल आत्मा की शुद्धि करता है, बल्कि पूर्व जन्म के कर्मों के बंधन से भी मुक्ति दिलाने की क्षमता रखता है।
कामदा एकादशी का व्रत एक विशेष आध्यात्मिक अवसर है, जिसे श्रद्धा, संयम और नियमपूर्वक किया जाए तो व्यक्ति के जीवन की अनेक बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं। चाहे वह स्वास्थ्य हो, दांपत्य जीवन की समस्याएं, नौकरी में रुकावट या मानसिक अस्थिरता, इस व्रत से सभी में राहत मिलती है। इसलिए, 8 अप्रैल 2025 को कामदा एकादशी का व्रत अवश्य करें और 9 अप्रैल को पारण करें। भगवान विष्णु की आराधना से न केवल सुख-शांति का अनुभव होगा, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होगा।
यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।