मकर संक्रांति, नए साल का पहला पावन पर्व, सूर्य के उत्तरायण होने से जुड़ा शुभ संदेश और तिल का महत्व

मकर संक्रांति हिंदू धर्म में नए साल का पहला महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे उत्साह और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण होने का संकेत देता है। इस खगोलीय घटना को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है। श्रीमद्भगवद्गीता में उत्तरायण के समय को शुभ, सकारात्मक और मोक्ष प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। आइए इस पावन अवसर के महत्व, परंपराओं और तिल के उपयोग की विशेषता को विस्तार से समझें।
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति को सूर्य देवता का पर्व कहा जाता है। इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे शास्त्रों में शुभ संकेत माना गया है।
●सूर्य का उत्तरायण होना: इस दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। इसे दिन के उजाले में वृद्धि और ऊर्जा के संचार का प्रतीक माना जाता है।
●धर्म और आध्यात्म का समय: गीता में उल्लेख है कि उत्तरायण काल में संसार त्यागने वाले व्यक्तियों को मोक्ष प्राप्त होता है।
●फसल कटाई का पर्व: यह दिन किसानों के लिए खास है, क्योंकि यह नई फसल के स्वागत और आभार का प्रतीक है।
तिल का महत्व और परंपराएं
मकर संक्रांति के दिन तिल का खास महत्व है। इसे भोजन और दान दोनों में उपयोग करने की परंपरा है।
1. तिल का सेवन:
तिल से बनी मिठाइयां जैसे तिल गुड़ के लड्डू और गजक इस दिन विशेष रूप से खाई जाती हैं।
तिल और गुड़ का मेल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है, क्योंकि यह सर्दी में गर्मी प्रदान करता है।
2. तिल का दान:
इस दिन तिल का दान पवित्र और पुण्यकारी माना जाता है।
गरीबों और जरूरतमंदों को तिल, गुड़, कंबल और भोजन दान करना विशेष फलदायी होता है।
मकर संक्रांति की परंपराएं और रीति-रिवाज
स्नान और पूजा: प्रातःकाल गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। इसके बाद सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा की जाती है।
खिचड़ी पर्व: उत्तर भारत में इस दिन खिचड़ी बनाकर प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है।
पतंग उत्सव: गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में पतंग उड़ाने की परंपरा है, जो जीवन में ऊंचाई और खुशी का प्रतीक है।
मकर संक्रांति का संदेश
मकर संक्रांति न केवल खगोलीय बदलाव का दिन है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मकता, प्रकाश और समृद्धि का संदेश भी लाता है। यह त्योहार हमें दान, सेवा और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
मकर संक्रांति का पर्व भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक है। सूर्य के उत्तरायण होने से जुड़े इस दिन का महत्व हमें सिखाता है कि जीवन में सकारात्मकता और दान का कितना महत्व है। तिल-गुड़ की मिठास और सूर्य देवता की कृपा के साथ इस पवित्र पर्व को हर्षोल्लास से मनाएं और सभी के जीवन में प्रकाश फैलाएं।
यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।