शनि प्रदोष व्रत, भगवान शिव और शनिदेव का विशेष आशीर्वाद पाने का पावन अवसर

शनि प्रदोष व्रत, भगवान शिव और शनिदेव का विशेष आशीर्वाद पाने का पावन अवसर
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हिंदू धर्म में शनि प्रदोष व्रत को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। यह विशेष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन शिव जी का रुद्राभिषेक करने से भक्तों को न केवल भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि शनिदेव का आशीर्वाद भी मिलता है। इस पावन दिन पर शिवलिंग का रुद्राभिषेक करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।


क्या है शनि प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त?


हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार शनि प्रदोष व्रत 28 दिसंबर, 2024 को रखा जाएगा।

व्रत की तिथि प्रारंभ: 28 दिसंबर को सुबह 2 बजकर 26 मिनट

तिथि समाप्ति: 29 दिसंबर को सुबह 3 बजकर 32 मिनट


इस प्रकार व्रत का पालन मुख्य रूप से 28 दिसंबर को किया जाएगा। शनिवार और प्रदोष व्रत का संयोग अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना गया है। इसे करने वाले भक्तों को शिव और शनि दोनों देवताओं का अनुग्रह प्राप्त होता है।


रुद्राभिषेक की विधि और उसका महत्व

रुद्राभिषेक भगवान शिव की प्रिय पूजा विधि है, जिसमें विशेष सामग्रियों का उपयोग कर शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।


1. पूजन सामग्री:

●गंगाजल या शुद्ध जल

●दूध, दही, घी, शहद और चीनी

●बेलपत्र, धतूरा, भस्म

●अक्षत, चंदन, फूल, दीपक और धूप

●पंचामृत और नैवेद्य


2. विधि:

●सबसे पहले शिवलिंग को गंगाजल और शुद्ध जल से स्नान कराएं।

●पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी) से अभिषेक करें।

●इसके बाद शुद्ध जल से फिर स्नान कराएं।

●शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें।

●दीप और धूप जलाकर ओम नमः शिवाय का जाप करें।

●अंत में भगवान शिव को नैवेद्य अर्पित करें और आरती करें।


शनि प्रदोष व्रत के लाभ


●इस व्रत के पालन से शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

●जीवन में चल रही बाधाएं समाप्त होती हैं।

●स्वास्थ्य, धन और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

●भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त होती है।


शनि प्रदोष व्रत आत्मशुद्धि, भक्ति और दिव्य कृपा प्राप्त करने का अद्भुत अवसर है। इस दिन शिवजी और शनिदेव की आराधना करने से भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करते हुए ओम नमः शिवाय का जाप जरूर करें और इस पावन दिन का अधिकतम लाभ उठाएं।

यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।

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