खरमास समाप्ति के साथ खुलेगा शुभ कार्यों का द्वार, सूर्य उपासना का है विशेष महत्व

खरमास समाप्ति के साथ खुलेगा शुभ कार्यों का द्वार, सूर्य उपासना का है विशेष महत्व
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हिंदू पंचांग के अनुसार, खरमास का समय जल्द ही समाप्त होने वाला है। खरमास, जिसे मलमास भी कहा जाता है, सूर्य देव की विशेष पूजा और आत्मचिंतन का समय माना जाता है। यह अवधि धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसमें शुभ और मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है।


खरमास के दौरान सूर्य देव की आराधना से जीवन में सकारात्मकता, ऊर्जा और सफलता का संचार होता है। आइए जानते हैं इस विशेष समय का महत्व, इसके पीछे छिपी धार्मिक मान्यताएं और समाप्ति के बाद आने वाले शुभ मुहूर्त।


खरमास: क्या है इसका महत्व?

खरमास का संबंध सूर्य के धनु और मीन राशियों में प्रवेश से है। जब सूर्य देव इन राशियों में भ्रमण करते हैं, तो इसे खरमास कहा जाता है।

यह अवधि आमतौर पर एक महीने की होती है।

खरमास के दौरान सूर्य कमजोर स्थिति में होते हैं, जिससे इसे मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है।

हालांकि, इस समय सूर्य देव की पूजा और आत्मचिंतन को विशेष महत्व दिया गया है।


धार्मिक मान्यताएं और खरमास में वर्जित कार्य


सनातन धर्म में खरमास के दौरान सभी शुभ और मांगलिक कार्यों को वर्जित माना गया है।

1. विवाह: इस अवधि में विवाह समारोह नहीं किए जाते।

2. गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश करना अशुभ माना जाता है।

3. यज्ञ और अन्य शुभ कार्य: इनका आयोजन भी स्थगित किया जाता है।


खरमास का उद्देश्य आत्मचिंतन, पूजा और साधना पर ध्यान केंद्रित करना है। यह समय जीवन के सांसारिक पहलुओं से हटकर आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करता है।


सूर्य देव की पूजा का महत्व


खरमास के दौरान सूर्य देव की पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है। सूर्य उपासना से:

आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।

स्वास्थ्य बेहतर रहता है, और रोगों से बचाव होता है।

करियर और आर्थिक समस्याओं में सुधार होता है।

पारिवारिक जीवन में सुख-शांति आती है।


सूर्य पूजा की विधि

1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।

2. तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें लाल चंदन और गुड़ मिलाएं।

3. सूर्य को अर्घ्य दें और सूर्य मंत्र का जाप करें:

"ॐ सूर्याय नमः"

4. लाल पुष्प और दीपक से सूर्य देव की आरती करें।


खरमास की समाप्ति और शुभ कार्यों की शुरुआत


खरमास की समाप्ति के साथ ही शुभ कार्यों का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

विवाह मुहूर्त: खरमास के बाद विवाह के लिए शुभ तिथियां आएंगी।

गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश के लिए उपयुक्त समय उपलब्ध होगा।

अन्य मांगलिक कार्य: व्यापार और धार्मिक आयोजनों के लिए अनुकूल समय आएगा।


खरमास आध्यात्मिक उन्नति और सूर्य उपासना का समय है। इस दौरान शुभ कार्यों से दूर रहते हुए पूजा, साधना और आत्मचिंतन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जैसे ही खरमास समाप्त होगा, मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होगा। सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए इस पवित्र समय का पूरा लाभ उठाएं।

यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।

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