मार्च 2025 में दो बार लगेगा पंचक, जानिए तिथियां और इसके प्रभाव
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हिंदू ज्योतिष शास्त्र में पंचक काल को विशेष और संवेदनशील अवधि माना जाता है। यह वह समय होता है जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में संचरण करता है। इस अवधि की कुल अवधि लगभग 5 दिनों की होती है, इसलिए इसे पंचक कहा जाता है।
मार्च 2025 में पंचक दो बार लगने जा रहे हैं। इस दौरान कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है, जबकि कुछ विशेष उपायों से इस दोष को कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि मार्च 2025 में पंचक कब लगेगा और इसके दौरान किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए।
मार्च 2025 में पंचक के आरंभ और समाप्ति की तिथियां
पहला पंचक:
शुरुआत – 5 मार्च 2025, बुधवार
🕰 समाप्ति – 9 मार्च 2025, रविवार
दूसरा पंचक:
शुरुआत – 19 मार्च 2025, बुधवार
🕰 समाप्ति – 23 मार्च 2025, रविवार
इस दौरान कोई भी महत्वपूर्ण कार्य करने से पहले शुभ मुहूर्त का विचार करना आवश्यक होता है।
पंचक के दौरान कौन से कार्य वर्जित माने जाते हैं?
नया घर बनाने से बचें:
पंचक काल में नया घर बनाने की शुरुआत करना अशुभ माना जाता है। यदि बहुत जरूरी हो, तो ज्योतिषीय उपाय करके ही निर्माण कार्य शुरू करें।
दाह संस्कार टालने की सलाह दी जाती है:
अगर इस समय किसी व्यक्ति का निधन हो जाए, तो अंतिम संस्कार करने से पहले विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए, ताकि पंचक दोष न लगे।
लकड़ी और ईंधन इकट्ठा न करें:
इस समय लकड़ी या ईंधन एकत्र करने से घर में आर्थिक संकट आ सकता है। इसलिए इस काम को टालना उचित होता है।
नया व्यवसाय या बड़ा निवेश न करें:
पंचक काल में नया व्यवसाय शुरू करने, निवेश करने या बड़ा लेन-देन करने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे हानि होने की संभावना रहती है।
बिस्तर और छत निर्माण से बचें:
पंचक काल में नया बिस्तर खरीदने या छत बनवाने से परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पंचक दोष को कम करने के उपाय
हनुमान चालीसा का पाठ करें – इस दौरान रोजाना हनुमान चालीसा पढ़ने से पंचक दोष के बुरे प्रभावों से बचा जा सकता है।
लकड़ी का कार्य करने से पहले हवन करें – यदि पंचक में लकड़ी का उपयोग करना जरूरी हो, तो पहले विधिपूर्वक हवन करना लाभकारी होता है।
भगवान शिव की आराधना करें – पंचक के दौरान भोलेनाथ की पूजा करने से सभी प्रकार की नकारात्मकता दूर होती है।
अग्निहोत्र और दान करें – इस काल में गरीबों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से दोष कम हो जाता है।
गायत्री मंत्र का जाप करें – यह मंत्र जाप करने से मानसिक और आध्यात्मिक शांति मिलती है।
पंचक काल को शुभ कैसे बना सकते हैं?
हालांकि पंचक को ज्योतिष में संवेदनशील समय माना जाता है, लेकिन कुछ कार्य ऐसे हैं जो इस समय करने से अत्यधिक शुभ फल प्रदान करते हैं:
✅ भगवान शिव और हनुमान जी की पूजा करने से पंचक का कुप्रभाव कम होता है।
✅ इस दौरान आध्यात्मिक कार्य और दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माना जाता है।
✅ पढ़ाई और नई विद्या सीखने के लिए पंचक का समय अच्छा होता है।
✅ ध्यान, योग और मानसिक शांति के लिए पंचक काल को उत्तम माना गया है।
यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।