थाईलैंड के प्रसिद्ध वाट फो मंदिर पहुंचेंगे पीएम मोदी, भगवान बुद्ध की लेटी मूर्ति के दर्शन से जुड़ा है गहरा आध्यात्मिक संदेश

थाईलैंड के प्रसिद्ध वाट फो मंदिर पहुंचेंगे पीएम मोदी, भगवान बुद्ध की लेटी मूर्ति के दर्शन से जुड़ा है गहरा आध्यात्मिक संदेश
X

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों अपने विदेश दौरे पर हैं और इस क्रम में वे थाईलैंड की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे हैं। इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने थाईलैंड की प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर संवाद किया, जिसमें दोनों देशों के सांस्कृतिक, व्यापारिक और आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का एक विशेष और आध्यात्मिक पहलू है — वाट फो मंदिर में भगवान बुद्ध की लेटती हुई प्रतिमा (Reclining Buddha) के दर्शन। यह मंदिर न केवल थाईलैंड का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, बल्कि इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान भी गहरी है।

वाट फो मंदिर: शांति, ध्यान और संस्कृति का संगम

वाट फो, जिसे वाट फ्रा चेत्तुपोन के नाम से भी जाना जाता है, थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में स्थित है और यह थाईलैंड के सबसे पुराने और बड़े मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में स्थित भगवान बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा लगभग 46 मीटर लंबी और 15 मीटर ऊंची है, जो न केवल स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है बल्कि इसके पीछे एक गहरी आध्यात्मिक व्याख्या भी छिपी है।

यह मूर्ति भगवान बुद्ध की उस स्थिति को दर्शाती है, जब उन्होंने महापरिनिर्वाण (शरीर त्याग) प्राप्त किया था। यह स्थिति जीवन की अनित्यता, आत्मशांति और अंतिम सत्य की ओर संकेत करती है। प्रधानमंत्री मोदी का इस प्रतिमा के दर्शन करना न केवल धार्मिक रूप से महत्व रखता है, बल्कि यह भारत-थाईलैंड के बीच बौद्ध सांस्कृतिक धरोहर के साझा संबंधों को भी उजागर करता है।

पीएम मोदी की यात्रा का संदेश: शांति और समरसता का संकल्प

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वाट फो मंदिर की यात्रा इस बात का प्रतीक है कि भारत की आध्यात्मिक सोच और वैश्विक दृष्टिकोण दोनों में शांति, करुणा और संयम को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। भगवान बुद्ध का दर्शन करने के पीछे न केवल श्रद्धा है, बल्कि एक वैश्विक संदेश भी छिपा है — “अहिंसा और करुणा के मार्ग पर चलकर ही विश्व कल्याण संभव है।”

यह यात्रा भारतीय संस्कृति की उस जड़ से भी जुड़ी है, जहां भारत केवल एक भूगोल नहीं, बल्कि विचारधारा है — जो योग, ध्यान और बौद्ध दर्शन के माध्यम से संपूर्ण विश्व में शांति का संदेश देती है।

भारत-थाईलैंड के रिश्तों में आध्यात्मिक पुल

भारत और थाईलैंड के बीच संबंध केवल राजनीतिक या व्यापारिक नहीं हैं, बल्कि यह सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों पर आधारित हैं। बौद्ध धर्म भारत से थाईलैंड पहुंचा, और आज भी वहां की जीवनशैली में इसका गहरा प्रभाव देखा जा सकता है। पीएम मोदी की यह यात्रा इसी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को और अधिक सशक्त बनाती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाट फो मंदिर यात्रा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत और वैश्विक संस्कृति में योगदान को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का माध्यम है। भगवान बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा के दर्शन यह सिखाते हैं कि जीवन का अंतिम सत्य आत्मशांति और सत्य की खोज में निहित है। इस यात्रा से एक बार फिर भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना उजागर हुई है, जो हर देश, हर संस्कृति और हर विचारधारा को एक साथ जोड़ने का आह्वान करती है।

यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।

Tags:
Next Story
Share it