शीतला अष्टमी 2025, बसोड़ा पर्व का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष स्थान है। यह पर्व देवी शीतला माता की उपासना के लिए समर्पित होता है, जिन्हें रोगों से मुक्ति और शीतलता प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से बसोड़ा व्रत रखा जाता है, जिसमें एक दिन पूर्व बनाए गए ठंडे भोजन का सेवन किया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से होली के आठवें दिन मनाया जाता है और इस बार यह शुभ दिन आज शनिवार, 29 मार्च 2025 को मनाया जा रहा है।
शीतला अष्टमी का पर्व स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा के लिए मनाया जाता है। विशेष रूप से माताएं अपने बच्चों की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए इस दिन व्रत रखती हैं और शीतला माता की पूजा-अर्चना करती हैं। इस दिन देवी की पूजा के साथ-साथ कुछ विशेष नियमों का पालन भी आवश्यक माना जाता है, ताकि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।
शीतला अष्टमी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 28 मार्च 2025 को रात 09:15 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 29 मार्च 2025 को शाम 07:30 बजे
पूजा का श्रेष्ठ समय: सूर्योदय से पूर्व या प्रातः 6:00 से 8:00 बजे तक
शीतला अष्टमी व्रत का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, शीतला माता की उपासना करने से संक्रामक रोगों से बचाव होता है। मान्यता है कि माता शीतला चेचक, छोटी माता, फोड़े-फुंसी जैसी बीमारियों से रक्षा करती हैं। इस दिन माता की पूजा करने और व्रत रखने से घर-परिवार में शांति, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहता है।
1. ठंडे भोजन (बसोड़ा) का सेवन: इस दिन व्रती ठंडा भोजन ग्रहण करते हैं, जिससे शरीर में शीतलता बनी रहती है और पाचन तंत्र मजबूत होता है।
2. पवित्रता और स्वच्छता: घर में स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जाता है, जिससे परिवार में रोगों का प्रभाव कम हो।
3. बच्चों की सुरक्षा: माताएं अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं और देवी से आशीर्वाद मांगती हैं।
शीतला माता की पूजा विधि
✅ प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
✅ शीतला माता की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं और कुमकुम, हल्दी, अक्षत और फूल अर्पित करें।
✅ बासी भोजन (बसोड़ा) का भोग लगाएं, जिसमें मीठे पकवान, पूड़ी और सब्जी शामिल होती है।
✅ शीतला माता को ठंडा दूध और जल अर्पित करें।
✅ शीतला माता के मंत्रों का जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
✅ जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करें, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है।
शीतला माता का मंत्र
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है:
"ॐ ह्रीं शीतलायै नमः"
इस मंत्र का 108 बार जाप करने से जीवन में आने वाली बीमारियों और कष्टों का निवारण होता है।
शीतला अष्टमी व्रत के नियम
🔹 इस दिन गर्म खाना नहीं बनाया जाता और बासी भोजन (बसोड़ा) ही खाया जाता है।
🔹 भोजन में अधिक मिर्च-मसाले नहीं होते, जिससे शरीर में शीतलता बनी रहे।
🔹 दिनभर शीतला माता के मंत्रों का जाप किया जाता है।
🔹 घर की स्वच्छता और सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि बीमारियां घर में प्रवेश न करें।
🔹 गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।
शीतला अष्टमी व्रत का फल
✔ बीमारियों से रक्षा: माता शीतला की कृपा से संक्रामक रोगों से बचाव होता है।
✔ सुख-समृद्धि: परिवार में शांति और सौभाग्य बढ़ता है।
✔ बच्चों की सुरक्षा: माता-पिता अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
✔ मानसिक शांति: देवी की उपासना से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन को शांति मिलती है।
शीतला अष्टमी 2025 का पर्व देवी शीतला की कृपा प्राप्त करने और परिवार के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दिन न केवल आध्यात्मिक रूप से बल्कि स्वास्थ्य और स्वच्छता के दृष्टिकोण से भी विशेष लाभकारी है। व्रत, पूजन और दान-पुण्य के माध्यम से हम माता शीतला की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा ला सकते हैं। इस बार 29 मार्च 2025 को आने वाली शीतला अष्टमी पर माता शीतला की विधिवत पूजा करें और अपने परिवार की सुख-समृद्धि सुनिश्चित करें।
यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।