सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन, 4 मार्च 2025 से पूर्वा भाद्रपदा नक्षत्र में करेंगे गोचर

सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन, 4 मार्च 2025 से पूर्वा भाद्रपदा नक्षत्र में करेंगे गोचर
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ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनका गोचर विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। जब कोई ग्रह अपनी राशि या नक्षत्र बदलता है, तो इसका प्रभाव समस्त प्राणियों और घटनाओं पर पड़ता है। खासतौर पर ग्रहों के राजा सूर्य का स्थान परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। आगामी 4 मार्च 2025 को सूर्य अपने नक्षत्र में परिवर्तन करेंगे और गुरु ग्रह के प्रभाव वाले पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। यह नक्षत्र परिवर्तन शाम के समय होगा और सूर्य 18 मार्च 2025 तक इसी नक्षत्र में स्थित रहेंगे। इस खगोलीय घटना का प्रभाव विभिन्न राशियों, प्रकृति और वैश्विक घटनाओं पर पड़ सकता है।

सूर्य का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश: ज्योतिषीय महत्व

पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र बृहस्पति ग्रह के अधीन आता है और इसे शुभ तथा आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। जब सूर्य इस नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इसका असर ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत व्यापक होता है। इस समय व्यक्ति के आत्मबल, नेतृत्व क्षमता और आध्यात्मिक झुकाव में वृद्धि देखी जाती है। सूर्य और बृहस्पति दोनों ही आत्मज्ञान, धर्म और उच्च विचारों के प्रतीक माने जाते हैं, ऐसे में यह गोचर धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों को भी प्रभावित करेगा।

सूर्य का यह परिवर्तन राजनीति, शिक्षा, प्रशासन और धार्मिक गतिविधियों में बड़े बदलाव लेकर आ सकता है। इस दौरान सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों में स्पष्टता और मजबूती देखी जा सकती है। वहीं, शिक्षा और आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को नई संभावनाएं मिल सकती हैं। कुछ राशियों के लिए यह नक्षत्र परिवर्तन अत्यधिक शुभ साबित होगा, जबकि कुछ को थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता होगी।

किन राशियों पर पड़ेगा विशेष प्रभाव?

सूर्य का यह गोचर मेष, सिंह, धनु और मीन राशि वालों के लिए विशेष लाभकारी हो सकता है। इनके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, करियर में उन्नति के अवसर मिलेंगे और स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहेगा। वहीं, मिथुन, कन्या और मकर राशि वालों को इस दौरान कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें अपने कार्यक्षेत्र और पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाकर चलने की जरूरत होगी।

क्या करें और क्या न करें?

इस अवधि में सूर्य की ऊर्जा को संतुलित रखने के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना, भगवान विष्णु की पूजा करना और जरूरतमंदों को दान करना शुभ रहेगा। वहीं, अहंकार और क्रोध से बचना आवश्यक होगा, क्योंकि सूर्य के प्रभाव से स्वभाव में तीक्ष्णता आ सकती है।

सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन से जुड़े ऐसे कई ज्योतिषीय पहलू हैं, जिनका प्रभाव हर व्यक्ति की कुंडली के आधार पर अलग-अलग होगा। अतः इस समय अपने निर्णय सोच-समझकर लें और आध्यात्मिक गतिविधियों में सहभागिता बढ़ाएं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहे।

यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।

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