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आगरा हत्याकांड: क्या एक थप्पड़ की कीमत मासूम की जान और खौफनाक अंजाम है?

किराए के विवाद से शुरू हुई रंजिश का लहूलुहान अंत, पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बड़ा घटनाक्रम।

आगरा हत्याकांड: क्या एक थप्पड़ की कीमत मासूम की जान और खौफनाक अंजाम है?
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उत्तर प्रदेश के आगरा में पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बनी एक सनसनीखेज वारदात का अंत बेहद नाटकीय और खौफनाक तरीके से हुआ है। शहर के एक जूता कारोबारी के घर से जुड़ी यह घटना न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि मामूली सा अहंकार किस कदर अपराध की गहरी खाई में धकेल सकता है। शनिवार तड़के जब शहर सो रहा था, तब बमरौली कटारा के पास पुलिस और एक अपराधी के बीच हुई मुठभेड़ ने इस पूरे घटनाक्रम को एक निर्णायक मोड़ दे दिया। यह मामला सिर्फ एक अपराध का नहीं, बल्कि उस प्रतिशोध की भावना का है जिसने एक आठ साल की मासूम की जिंदगी को बेरहमी से कुचल दिया था।


घटना की शुरुआत महज कुछ रुपयों के लेनदेन और स्वाभिमान की लड़ाई से हुई थी, जिसने देखते ही देखते एक वीभत्स रूप अख्तियार कर लिया। आरोपी, जो पीड़ित परिवार के यहाँ बतौर किराएदार रह रहा था, एक थप्पड़ का बदला लेने की आग में इस कदर जल रहा था कि उसने मासूमियत का भी लिहाज नहीं किया। 24 मार्च को अंजाम दी गई इस वारदात के बाद से ही पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जुटी थीं, क्योंकि शव को जिस तरह से आटे के ड्रम में छिपाया गया था, उसने कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। पुलिस ने उस पर इनाम भी घोषित कर दिया था, लेकिन वह लगातार अपनी लोकेशन बदलकर चकमा दे रहा था।


डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास के नेतृत्व में चल रहे इस ऑपरेशन में शनिवार सुबह 3 बजे उस वक्त बड़ी सफलता मिली, जब मुखबिर के जरिए आरोपी के फिरोजाबाद भागने की पुख्ता जानकारी मिली। घेराबंदी के दौरान अपराधी ने आत्मसमर्पण करने के बजाय खाकी पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं, जिसमें एक उपनिरीक्षक (दारोगा) भी घायल हो गए। आत्मरक्षा में की गई पुलिस की जवाबी फायरिंग में आरोपी गंभीर रूप से जख्मी हो गया। हालांकि उसे तत्काल इलाज के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मुठभेड़ ने उस खौफनाक अध्याय को समाप्त कर दिया जो एक छोटी सी बहस से शुरू हुआ था।


इस पूरे प्रकरण की तह में जाने पर पता चलता है कि आरोपी सुनील और बच्ची के परिवार के बीच लगभग 11 दिन पहले किराए को लेकर तीखी नोकझोंक हुई थी। बकाया भुगतान न होने पर बच्ची के चाचा ने गुस्से में सुनील को थप्पड़ मार दिया था और उसके कमरे पर ताला जड़ दिया था। इसी अपमान को वह बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसने परिवार को सबसे गहरा जख्म देने की साजिश रच डाली। करीब 30 घंटे तक बच्ची के लापता रहने और फिर उसकी दर्दनाक मौत की खबर ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया था। अब आरोपी की मौत के साथ ही पुलिस की फाइल में यह केस बंद होने की कगार पर है, लेकिन पीछे छोड़ गया है असुरक्षा और रंजिश के विनाशकारी परिणामों के अनगिनत सवाल

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