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3 जुलाई से शुरू होगी पवित्र अमरनाथ यात्रा, जानें बालटाल और पहलगाम से दर्शन के दो प्रमुख मार्ग

3 जुलाई से शुरू होगी पवित्र अमरनाथ यात्रा, जानें बालटाल और पहलगाम से दर्शन के दो प्रमुख मार्ग
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हिंदू धर्म में अमरनाथ यात्रा को एक अत्यंत पावन और आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है। हर साल हजारों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन पुण्यदायक यात्रा पर निकलते हैं ताकि वे पवित्र गुफा में स्थित हिमलिंग के दर्शन कर सकें। इस बार अमरनाथ यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई 2025 से हो रही है, और यह यात्रा लगभग दो महीनों तक चलेगी, जिसमें श्रावण पूर्णिमा के दिन इसका समापन होगा।

अमरनाथ यात्रा केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि श्रद्धा, साहस और तपस्या का प्रतीक है। जम्मू-कश्मीर के बर्फीले पहाड़ों के बीच स्थित अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग भक्तों के लिए एक दिव्य चमत्कार है। इस यात्रा के लिए श्रद्धालु दो प्रमुख मार्गों से होकर पहुंच सकते हैं—पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग। दोनों मार्गों की अपनी विशेषताएं और कठिनाइयाँ हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर श्रद्धालु अपनी यात्रा का चयन करते हैं।

पहलगाम रूट को पारंपरिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अधिक लोकप्रिय माना जाता है। यह मार्ग लगभग 46 किलोमीटर लंबा है और यहां से यात्रा करते हुए भक्त चंदनवाड़ी, पिस्सू घाटी, शेषनाग, पंचतरनी होते हुए अमरनाथ गुफा तक पहुंचते हैं। यह मार्ग अपेक्षाकृत लंबा है, लेकिन धार्मिक वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है।

वहीं दूसरी ओर, बालटाल मार्ग तुलनात्मक रूप से छोटा और तीव्र है। यह मार्ग केवल 14 किलोमीटर लंबा है और साहसिक यात्रियों के लिए उपयुक्त है। बालटाल से सीधे गुफा तक एक दिन में भी यात्रा की जा सकती है, लेकिन मार्ग की तीव्र चढ़ाई और मौसम की अनिश्चितता इसे चुनौतीपूर्ण बनाती है। हालांकि, हेलीकॉप्टर सेवा बालटाल से उपलब्ध होती है, जिससे कई श्रद्धालु इस मार्ग को प्राथमिकता देते हैं।

इस वर्ष प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा को लेकर व्यापक तैयारियाँ की हैं। हर रूट पर मेडिकल सुविधाएं, लंगर, टेंट, सुरक्षा कर्मी और निगरानी टीमों की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं को यात्रा पर निकलने से पहले पंजीकरण और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

बाबा बर्फानी के दर्शन करना हर शिवभक्त का सपना होता है, और अमरनाथ यात्रा उसका अद्वितीय अवसर प्रदान करती है। यह यात्रा केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक आंतरिक साधना है जो भक्त को भगवान शिव के साक्षात सान्निध्य का अनुभव कराती है।

यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।

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