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बच्चों की तस्करी से अंगों के सौदे तक: रांची पुलिस की कार्रवाई में पुरुलिया का सूरज रवानी निकला मास्टरमाइंड, गुलगुलिया गैंग का बड़ा खुलासा

अंश-अंशिका की बरामदगी के बाद रांची पुलिस का बड़ा खुलासा, 13 गिरफ्तार, 12 बच्चे सुरक्षित, तीन राज्यों तक फैला नेटवर्क

बच्चों की तस्करी से अंगों के सौदे तक: रांची पुलिस की कार्रवाई में पुरुलिया का सूरज रवानी निकला मास्टरमाइंड, गुलगुलिया गैंग का बड़ा खुलासा
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रांची से लापता अंश और अंशिका की सुरक्षित बरामदगी के बाद झारखंड पुलिस के सामने एक ऐसा सच आया है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। दैनिक अखबार हिंदुस्तान की खबर के अनुसार रांची पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह मामला केवल बच्चों के अपहरण तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे बच्चों की तस्करी, जबरन श्रम, देह व्यापार और यहां तक कि अंगों के अवैध सौदे तक का एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इस नेटवर्क का प्रमुख खरीदार पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का रहने वाला सूरज रवानी बताया जा रहा है।

हिंदुस्तान अखबार की रिपोर्ट के अनुसार एसएसपी राकेश रंजन के बताया कि पुलिस की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि सूरज रवानी चोरी और अगवा किए गए बच्चों को विभिन्न गिरोहों से खरीदता था। बाद में उनसे भीख मंगवाने, चोरी करवाने और घरेलू श्रम जैसे कार्य कराए जाते थे। बच्चियों के बड़े होने पर उन्हें देह व्यापार में धकेलने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा, कई मामलों में बच्चों के अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त के संकेत भी मिले हैं।

पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क के तार पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा तक जुड़े हुए हैं। झारखंड से चोरी हुए बच्चों को इन राज्यों में ले जाकर बेचा जाता था। अब तक की जांच में दर्जनों बच्चों की तस्करी की आशंका जताई जा रही है। एसएसपी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में बच्चों के अंगों की बिक्री की जानकारी बेहद गंभीर है और इसकी जांच के लिए झारखंड पुलिस की एक विशेष टीम जल्द ही वहां भेजी जाएगी।

इस पूरे गिरोह को पुलिस “गुलगुलिया गैंग” के नाम से पहचान रही है। जांच में सामने आया है कि यह गैंग तीन स्तरों पर काम करता था। पहले चरण में रेकी की जाती थी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निशाना बनाया जाता था। दूसरे चरण में बच्चों को एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचाया जाता था। तीसरे चरण में बच्चों से जबरन श्रम, चोरी, भीख मंगवाने या फिर बच्चियों को देह व्यापार में धकेलने जैसे गंभीर अपराध किए जाते थे। कुछ मामलों में अंगों के सौदे की भी पुष्टि हुई है।

पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह के सदस्य गली-मुहल्लों और हाट-बाजारों में गुब्बारे बेचने, कचरा बीनने या छोटे-मोटे काम करने की आड़ में बच्चों की पहचान करते थे। जैसे ही उन्हें मौका मिलता, वे बच्चों को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाते थे। अंश और अंशिका के अपहरण में भी नव खेरवार उर्फ सूर्य और सोनी कुमारी ने इसी तरीके का इस्तेमाल किया था।

रांची पुलिस ने रविवार को इस गिरोह से जुड़े 13 लोगों की गिरफ्तारी की है और उनके कब्जे से 12 बच्चों को सुरक्षित बरामद किया गया है। ये बच्चे रांची, धनबाद, बोकारो और चाईबासा से चोरी किए गए थे। पुलिस अब इन बच्चों के परिजनों की तलाश कर रही है ताकि उन्हें सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया जा सके।

गिरफ्तार आरोपियों में प्रमोद कुमार, आशिक गोप, बेबी देवी, विरोधी खेरवार उर्फ अनुराग, अंथोनी खरवार, संन्यासी खेरवार, मालिन देवी, चांदनी देवी, सीता देवी, दीनू भुइयां, सोनिया देवी, राज रवानी और उपैइया खेरवार शामिल हैं। इससे पहले अंश-अंशिका मामले में नव खेरवार और सोनी कुमारी की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क में सिल्ली, रामगढ़, लातेहार और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया क्षेत्र के लोग सक्रिय रूप से शामिल हैं।

एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि यह गैंग पिछले लगभग दस वर्षों से सक्रिय था और अब तक कई बच्चों को अलग-अलग राज्यों में बेच चुका है। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि बिहार के औरंगाबाद निवासी अशोक सिंह और बाबू साहेब तथा पश्चिम बंगाल का सूरज रवानी इस नेटवर्क के प्रमुख खरीदारों में शामिल रहे हैं।

पुलिस की विशेष टीम अब पश्चिम बंगाल जाकर सूरज रवानी और उससे जुड़े नेटवर्क की गहराई से जांच करेगी। साथ ही झारखंड में गुलगुलिया गैंग के बचे हुए गुर्गों की धरपकड़ के लिए अभियान तेज किया जाएगा।

अंश और अंशिका की सकुशल बरामदगी जहां राहत की खबर है, वहीं इस मामले से सामने आया सच यह भी बताता है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज और प्रशासन दोनों को कहीं अधिक सतर्क होने की जरूरत है। गली-मुहल्लों में घूमने वाले संदिग्ध व्यक्तियों, गुब्बारे या छोटी चीजें बेचने के बहाने बच्चों से संपर्क करने वालों पर नजर रखना अब केवल सावधानी नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी बन चुकी है।

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