कोडीन तस्करी: भगोड़े शुभम जायसवाल का पिता भोला जायसवाल विदेश भागने से पहले दबोचा गया
थाईलैंड भागने से पहले कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़ा गया मास्टरमाइंड का शुभम जायसवाल पिता भोला जायसवाल

कोडीन तस्करी में वांछित शुभम जायसवा का पिता भोला जायसवाल गिरफ्तार
कोडीन कफ सिरप तस्करी में वांछित शुभम जायसवाल का पिता भोला जायसवाल भी देश छोड़कर भागने की फिराक में था। सोनभद्र पुलिस ने उसे कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया है। इस बड़ी गिरफ्तारी ने उत्तर प्रदेश की पुलिस को कोडीन कफ सिरप तस्करी मामले में अहम सफलता दिलाई है। कोलकाता एयरपोर्ट पर थाईलैंड जाने वाली फ्लाइट में बोर्डिंग से ठीक पहले सोनभद्र पुलिस ने भोला प्रसाद जायसवाल को हिरासत में ले लिया। भोला प्रसाद शुभम जायसवाल के पिता हैं जिन्हें इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
पुलिस को जानकारी मिली थी कि भोला प्रसाद भी बेटे शुभम की तरह देश छोड़कर भाग सकता है, इसी सूचना के आधार पर सोनभद्र पुलिस की टीम ने कोलकाता एयरपोर्ट पर फ्लाइट पकड़ने से पहले गिरफ्तार कर लिया। भोला प्रसाद जायसवाल थाईलैंड के रास्ते सिंगापुर जाने की योजना बना रहा था।
यह गिरफ्तारी महज एक और अपराधी को पकड़ने की ख़बर नहीं है। यह उस जटिल मकड़जाल को उजागर करती है जिसमें पारिवारिक रिश्ते, व्यापारिक ढांचे और अवैध तस्करी के धागे आपस में गुंथे हुए हैं। भोला प्रसाद के नाम पर रजिस्टर्ड शैली ट्रेडर्स, रांची वह कंपनी थी जिसके माध्यम से सात लाख 53 हजार शीशियां (7.53 करोड़ मिलीलीटर) कोडीनयुक्त सिरप की आपूर्ति सोनभद्र की दो मेडिकल दुकानों को की गई थी।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के अनुसार, विशेष जांच दल की गहन पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। भदोही, चंदौली, वाराणसी और सोनभद्र में करीब 25 करोड़ रुपये के फर्जी लेन-देन का जाल बिछाया गया था। इनमें से अधिकांश फर्में कागजों पर तो मौजूद थीं, लेकिन वास्तविकता में उनका कोई अस्तित्व नहीं था। यह पूरी योजना बेहद सुनियोजित और संगठित तरीके से संचालित की जा रही थी।
औषधि निरीक्षक राजेश कुमार मौर्य की शिकायत पर दर्ज मामले में मेसर्स मां कृपा मेडिकल और मेसर्स शिविक्षा फार्मा नामक दो मेडिकल स्टोरों की भूमिका केंद्र में है। ये दोनों दुकानें सगे भाइयों द्वारा संचालित होने का खुलासा हुआ है। इन स्टोरों को भारी मात्रा में कोडीनयुक्त सिरप की सप्लाई शैली ट्रेडर्स के माध्यम से की जा रही थी।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब 18 नवंबर को सोनभद्र में एक वाहन को रोका गया। ऊपर से देखने पर वाहन में चिप्स के पैकेट दिखाई दे रहे थे, लेकिन जब पुलिस ने गहनता से जांच की तो उन पैकेटों के नीचे से बड़ी मात्रा में कोडीन कफ सिरप की खेप बरामद हुई। इस घटना ने जांच एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया और फिर शुरू हुआ जांच और गिरफ्तारियों का सिलसिला।
जांच में अमित सिंह टाटा की गिरफ्तारी भी एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। यूपी एसटीएफ ने जौनपुर के मूल निवासी अमित सिंह टाटा को लखनऊ से गिरफ्तार किया था, जिससे पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए। इन खुलासों ने बात की तस्दीक की कि यह पूरा नेटवर्क कई राज्यों में ही नहीं बल्कि बांग्लादेश तक फैला हुआ है और इसमें बड़ी संख्या में रसूखदार चेहरे भी शामिल हैं।
भोला प्रसाद के खिलाफ चंदौली, जौनपुर और गाजीपुर में भी मामले दर्ज हैं। पुलिस ने संलिप्त बैंक खातों को फ्रीज करा दिया है और अब ट्रांजिट रिमांड पर भोला प्रसाद को सोनभद्र लाया जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि भोला प्रसाद से गहन पूछताछ से इस मामले को कई परतें खुलेगी और कई और बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं।
वाराणसी पुलिस भी मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल को विदेश से भारत वापस लाने की तैयारी में है। अधिकारियों का मानना है कि शुभम की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरे नेटवर्क का पूरी तरह से खुलासा किया जा सकेगा।
यह मामला उत्तर प्रदेश में ड्रग माफिया के खिलाफ चल रही मुहिम में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन सवाल यह भी उठता है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार कैसे संभव हो पाया? क्या केवल कुछ व्यक्तियों की गिरफ्तारी से यह नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो जायेगा, या इसके पीछे और भी गहरे राज़ छिपे हैं, जिन्हें उजागर किया जाना बाकी है?

