कॉमनवेल्थ स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस का भारत में शुभारंभ, पीएम मोदी बोले—भारतीय लोकतंत्र का दायरा असाधारण
नई दिल्ली में 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन, महिला नेतृत्व पर प्रधानमंत्री का जोर

भारत 14 से 16 जनवरी के बीच राष्ट्रमंडल देशों के संसद अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन का गुरुवार को नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में औपचारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इसे भारत के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि यह चौथा अवसर है जब कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसिडिंग ऑफिसर्स की यह प्रतिष्ठित कॉन्फ्रेंस भारत में आयोजित हो रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मंच लोकतांत्रिक मूल्यों के आदान-प्रदान और संसदीय परंपराओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में भारतीय लोकतंत्र की व्यापकता और विविधता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र यूं ही नहीं कहा जाता, बल्कि इसके पीछे इसकी विशाल भागीदारी, संस्थागत मजबूती और समावेशी स्वरूप है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से महिला नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत की राष्ट्रपति देश की पहली नागरिक हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि भारतीय महिलाएं अब केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि निर्णायक नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं, जो भारत की लोकतांत्रिक प्रगति को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने जिस ऐतिहासिक स्थल पर सम्मेलन आयोजित किया गया है, उसके महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संविधान सदन का सेंट्रल हॉल भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का साक्षी रहा है और यहां बैठकर संवाद करना अपने-आप में एक विशेष अनुभव है। इसी स्थान पर देश की आज़ादी से जुड़े कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए और संविधान निर्माण की प्रक्रिया को दिशा मिली। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह स्थल भारत की संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है।
उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने किया। सम्मेलन में विभिन्न राष्ट्रमंडल देशों से आए संसद अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी भाग ले रहे हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में संसदीय लोकतंत्र को सशक्त करने, संस्थागत सहयोग बढ़ाने और समकालीन वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
