दिल्ली के पालम में उस सुबह ऐसा क्या हुआ कि चीखों के बीच थम गईं कई सांसें?
सुरक्षा के दावों और बंद रास्तों के बीच मौत का वो खौफनाक मंजर, जिसने राजधानी को झकझोर दिया।

दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार की सुबह एक ऐसी त्रासदी की गवाह बनी, जिसने स्थानीय प्रशासन से लेकर सुरक्षा मानकों तक पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब लोग अपने घरों में दिन की शुरुआत की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक उठती लपटों ने एक चार मंजिला इमारत को अपनी आगोश में ले लिया, जिससे आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो यह महज एक आग की घटना नहीं थी, बल्कि बंद रास्तों और धुएं के गुबार के बीच जिंदगी और मौत की वह जद्दोजहद थी, जिसने देखते ही देखते कई हंसते-खेलते परिवारों को मातम में बदल दिया। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इमारत के भूतल पर स्थित एक कॉस्मेटिक की दुकान से शुरू हुई चिंगारी ने इतनी तेजी से विकराल रूप धारण किया कि ऊपरी मंजिलों पर रह रहे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। आग की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूचना मिलते ही दमकल की 30 गाड़ियों को मोर्चे पर तैनात करना पड़ा, लेकिन संकरी गलियों और धुएं के दबाव ने राहत कार्य में पल-पल बाधा उत्पन्न की।
इस हृदयविदारक घटना के दौरान इमारत के भीतर करीब 18 लोगों के मौजूद होने की खबर है, जिनके पास सुरक्षित बाहर निकलने का कोई वैकल्पिक रास्ता मौजूद नहीं था। चश्मदीदों ने बताया कि जब आग ने मुख्य निकास द्वार को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया, तो भीतर फंसे लोगों में चीख-पुकार मच गई और अपनी जान बचाने के लिए कुछ लोगों ने ऊंची मंजिल से नीचे छलांग लगाने जैसा जानलेवा जोखिम भी उठाया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचावकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि भीषण गर्मी और जहरीले धुएं के कारण इमारत के भीतर दाखिल होना नामुमकिन सा लग रहा था। इस भीषण अग्निकांड में अब तक 9 लोगों के हताहत होने की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलसे हुए बताए जा रहे हैं, जिन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस और फॉरेंसिक टीमें अब इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि क्या इमारत में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या फिर किसी बड़ी लापरवाही ने इतने लोगों की जान ले ली।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता फिलहाल प्रभावितों को राहत पहुंचाने और घायलों के उपचार की है, लेकिन जिस तरह से एक व्यावसायिक गतिविधि के कारण पूरी आवासीय इमारत आग का गोला बन गई, उसने शहरी इलाकों में चल रही अवैध गतिविधियों और सुरक्षा ऑडिट की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है और उनका आरोप है कि रिहायशी इलाकों में ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण मौत को दावत देने जैसा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं कि कैसे एक छोटी सी चिंगारी ने संकीर्ण निकास व्यवस्था के चलते इतने बड़े नरसंहार का रूप ले लिया। फिलहाल पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और राहत कार्य अभी भी जारी है, जबकि राजधानी की हवा में घुला वह धुआं अभी भी उन सवालों के जवाब तलाश रहा है जिनका सीधा संबंध इंसानी जान की कीमत से है।
