अदालतों से लेकर स्कूलों तक... पूरे देश को बम की झूठी धमकियों से दहलाने वाला वह अदृश्य 'खौफ' आखिर पुलिस के हत्थे कैसे चढ़ा?
लगातार आ रहे रहस्यमयी ई-मेल और बम की सूचनाओं ने लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा रखी थी, लेकिन जब इस खौफनाक साजिश के पीछे का असली चेहरा और ठिकाना सामने आया, तो हर कोई सन्न रह गया।

कभी किसी नामी स्कूल में बम रखे होने की सूचना, तो कभी कुछ ही घंटों में अदालत या अहम सरकारी इमारतों को धमाके से उड़ाने की चेतावनी। पिछले काफी समय से देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे खौफनाक संदेशों ने न केवल आम जनता के मन में दहशत का भारी माहौल पैदा कर रखा था, बल्कि देश की सबसे मुस्तैद सुरक्षा एजेंसियों को भी लगातार भागदौड़ करने पर मजबूर कर दिया था। स्थिति की संवेदनशीलता तब और अधिक बढ़ गई जब इन रहस्यमयी ई-मेल और फोन कॉल्स में पाकिस्तान और बलूचिस्तान से जुड़े संदिग्ध नामों का जानबूझकर जिक्र किया जाने लगा। एक के बाद एक आ रही इन धमकियों ने पूरे सिस्टम की रातों की नींद हराम कर दी थी और हर किसी के मन में केवल एक ही सवाल गूंज रहा था कि आखिर वह कौन सा अदृश्य दुश्मन है जो सुरक्षा व्यवस्था को इस तरह से खुली चुनौती दे रहा है।
इस अनसुलझी और बेहद तनावपूर्ण स्थिति के बीच दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी और अहम कार्रवाई को अंजाम देते हुए आखिरकार इस पूरी खौफनाक साजिश के मास्टरमाइंड को बेनकाब कर दिया है। साइबर सेल और खुफिया एजेंसियों की लंबी तकनीकी मशक्कत के बाद जांच की आंच किसी सरहद पार बैठे आतंकी आका तक नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के एक शहर तक जा पहुंची। दिल्ली पुलिस की टीम ने सटीक सूचना के आधार पर कर्नाटक के मैसूर में एक किराए के मकान पर छापेमारी कर 47 वर्षीय श्रीनिवास लुईस नाम के एक शख्स को धर दबोचा। शुरुआती तफ्तीश में यह चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है कि इसी व्यक्ति ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत देश के विभिन्न शहरों के हाई कोर्ट्स, सरकारी दफ्तरों और शिक्षण संस्थानों को एक हजार से अधिक फर्जी और धमकी भरे ई-मेल भेजे थे।
पुलिस के उच्चाधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ने दहशत का यह साम्राज्य खड़ा करने के लिए बहुत ही शातिराना तरीके से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और अलग-अलग ई-मेल आईडी का एक जटिल जाल बुना था। इन झूठे या 'होक्स' (Hoax) संदेशों का मुख्य उद्देश्य किसी वास्तविक आतंकवादी हमले को अंजाम देना नहीं था, बल्कि पूरे देश में कानून-व्यवस्था को अस्थिर करते हुए केवल अफरा‑तफरी और डर का माहौल तैयार करना था। श्रीनिवास लुईस द्वारा फैलाई गई इस अफवाहों की आंधी के कारण कई बार महत्वपूर्ण और संवेदनशील संस्थानों पर आपातकालीन अलर्ट जारी करना पड़ा और वहां अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ी। इस पूरी कवायद में न केवल सरकारी संसाधनों का भारी नुकसान हुआ बल्कि आम लोगों को भी दहशत के साये में जीना पड़ा। फिलहाल पुलिस इस बात की गहन जांच कर रही है कि इस विकृत साजिश के पीछे उसका असली मकसद क्या था।
