धनबाद में अचानक क्यों फटी जमीन और अंधेरे में समा गया पूरा परिवार? प्रशासन पर उठे तीखे सवाल
सोनारडीह में मची चीख-पुकार के बीच अवैध उत्खनन और सिस्टम की मिलीभगत पर गहराता विवाद

मंगलवार की शाम जब धनबाद के सोनारडीह थाना क्षेत्र के टांडाबारी बस्ती के लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, तब एक ऐसी अप्रत्याशित और दहला देने वाली आवाज गूंजी जिसने पूरी बस्ती को हिलाकर रख दिया। पलक झपकते ही एक हंसता-खेलता परिवार प्रकृति के प्रकोप या मानवीय चूक के गहरे गड्ढे में समा गया। यह घटना महज एक हादसा नहीं है, बल्कि उस खोखली व्यवस्था की पोल खोलती है जहां जमीन के नीचे की संपत्ति ऊपर रहने वाले इंसानों की जान की दुश्मन बन गई है। जमीन का अचानक फटना और देखते ही देखते एक पूरे मकान का भूगर्भ में समा जाना कई ऐसे अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है, जिनका जवाब अब आक्रोशित जनता सीधे प्रशासन और खनन विभाग से मांग रही है।
जैसे ही मलबे और धंसती जमीन की खबर फैली, कतरास-बोकारो मार्ग रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर था, जिन्होंने सड़क जाम कर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और बीसीसीएल (BCCL) प्रबंधन की नाक के नीचे कोयला तस्करों का सिंडिकेट सक्रिय है। लोगों का कहना है कि मशीनों और अवैध धमाकों के जरिए जमीन को इस कदर छलनी कर दिया गया है कि अब यहां इंसानी जीवन असुरक्षित हो चुका है। पुलिस और अधिकारियों को मौके पर जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ा, क्योंकि लोगों का मानना है कि यदि अवैध उत्खनन पर समय रहते लगाम लगाई गई होती, तो आज तीन जिंदगियां इस तरह काल के गाल में न समातीं।
रेस्क्यू ऑपरेशन की चुनौती किसी बुरे सपने से कम नहीं थी, क्योंकि रात के घने अंधेरे के साथ-साथ घटनास्थल पर पड़ी विशाल दरारें बचाव दल के लिए मौत का जाल बनी हुई थीं। बीसीसीएल की रेस्क्यू टीम रात 9 बजे ही सक्रिय हो गई थी, लेकिन तकनीकी बाधाओं और दोबारा धंसान के डर से वास्तविक बचाव कार्य रात 11 बजे के करीब शुरू हो सका। लगभग चार घंटे तक चले इस हृदयविदारक अभियान में टॉर्च और सर्च लाइट की रोशनी में जब मलबे को हटाया गया, तो मंजर देख बचाव कर्मियों की भी रूह कांप गई। अंततः सुबह तीन बजे के करीब मलबे के ढेर से उन तीन लोगों को बाहर निकाला गया, जो अब इस दुनिया में नहीं थे।
शवों के बाहर निकलते ही घटनास्थल पर मौजूद परिजनों और ग्रामीणों का सब्र टूट गया और चारों ओर मातमी सन्नाटा चीख-पुकार में बदल गया। पुलिस प्रशासन के लिए स्थिति तब और चुनौतीपूर्ण हो गई जब आक्रोशित भीड़ ने शवों को ले जाने से रोकने का प्रयास किया, जिससे मौके पर काफी देर तक जद्दोजहद चलती रही। काफी समझाने-बुझाने और सुरक्षा घेरे के बीच एंबुलेंस के जरिए शवों को पोस्टमार्टम के लिए धनबाद के SNMMCH अस्पताल भेजा गया। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सुरक्षा बल तैनात हैं, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर धनबाद के कोयलांचल क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और अवैध माइनिंग के काले खेल पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
