डोना गांगुली की ट्रोलिंग, साइबर पुलिस से हुई शिकायत
कोलकाता की चर्चित नृत्यांगना और सौरव गांगुली की पत्नी दोना गांगुली को लेकर सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों ने साइबर अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति पर बड़ी बहस छेड़ दी है।

कोलकाता. जानी मानी नृत्यांगना और पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली की पत्नी डोना गांगुली ने सोशल मीडिया पर हुई अभद्र टिप्पणियों के खिलाफ आवाज उठाई तो मामला सिर्फ उनके सम्मान का नहीं रहा। यह उस बड़े सवाल की तरफ भी इशारा करता है कि आखिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बढ़ती हिंसक भाषा और डिजिटल भीड़ किस दिशा में जा रही है। क्या यह सिर्फ एक कलाकार का मामला है, या एक ऐसी समस्या का संकेत जो हर डिजिटल नागरिक को छूती है?
मामला तब गंभीर हुआ जब उनके कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के प्रदर्शन के बाद फेसबुक के एक पेज ने बार बार उनकी छवि के खिलाफ आपत्तिजनक बातें पोस्ट कीं। डोना ने इसे महज आलोचना नहीं, बल्कि व्यक्तिगत हमले का रूप बताया और इसी आधार पर ठाकुरपुकुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शुरुआती जांच के बाद केस को लालबाजार स्थित साइबर सेल को सौंप दिया गया। इससे स्पष्ट है कि पुलिस इसे एक बड़े साइबर अपराध का हिस्सा मान रही है।
साइबर सेल के अधिकारियों के अनुसार शिकायत ऐसे पेज के खिलाफ है जो अपने परिचय छिपाकर संचालन करता है। जांचकर्ता अब फेसबुक से उस अकाउंट से जुड़ी तकनीकी जानकारियां, लोकेशन डिटेल और संबंधित डेटा मांगेंगे। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल के जरिए ऐसे हमलों में तेजी आई है और जांच एजेंसियों को हर बार नए तरीके अपनाने पड़ते हैं।
इसी घटना ने यह सवाल भी उठाया कि साइबर कानूनों को लेकर आम लोगों की समझ कितनी सीमित है। पुलिस के अनुभव बताते हैं कि कई लोग मानते हैं कि ऑनलाइन टिप्पणी सिर्फ हल्की फुल्की अभिव्यक्ति है। कुछ जानते हुए भी करते हैं, शायद यह सोचकर कि गिरफ्तारी का खतरा वास्तविक नहीं। लेकिन साइबर कानून स्पष्ट हैं और अभद्र टिप्पणी, चरित्र हनन या किसी की निजी गरिमा से खिलवाड़ सीधे अपराध की श्रेणी में आता है।
कई मामलों में पुलिस ने आरोपियों को बुलाकर पूछा है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। जवाब प्रायः एक जैसा होता है कि उन्होंने अपराध की गंभीरता को समझा ही नहीं। यह न केवल उनकी कानूनी अज्ञानता का संकेत है, बल्कि डिजिटल मंचों पर बढ़ती आक्रामकता को भी दर्शाती है। वहीं या भी सही है कि कानून से अनभिज्ञ होना बेगुनाही का आधार नहीं हो सकता।
अधिकारियों का मानना है कि ऑनलाइन उत्पीड़न की रिपोर्टिंग बढ़ रही है और यह अपने आप में समाज के भीतर मौजूद खामोश तनाव को व्यक्त करता है।
डोना गांगुली की शिकायत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आम पीड़ितों के लिए एक उदाहरण बन सकती है। कई लोग सोशल मीडिया दुरुपयोग झेलते हैं, लेकिन शिकायत करने से हिचकते हैं। पुलिस बार बार अपील करती है कि उत्पीड़न हो तो तुरंत सूचना दें और प्लेटफॉर्म पर चुपचाप सहने की बजाय कानूनी मदद लें।
शुक्रवार शाम तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी, लेकिन जांच आगे बढ़ रही है। यह देखना होगा कि इस केस से साइबर ट्रोलिंग को लेकर जागरूकता बढ़ेगी या फिर यह भी कई मामलों की तरह एक और डिजिटल विवाद बनकर रह जाएगा। डिजिटल दुनिया में गरिमा और कानून के बीच संतुलन अब पहले से अधिक जरूरी हो गया है।
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