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गुरुग्राम के इस सुनसान रास्ते पर आखिर उस रात ऐसा क्या हुआ कि थम गईं तीन सांसें?

सड़क किनारे टहलते वक्त आई उस 'बेकाबू रफ्तार' ने पीछे छोड़ दिए कई अनसुलझे सवाल और एक मातम पसरा गांव।

गुरुग्राम के इस सुनसान रास्ते पर आखिर उस रात ऐसा क्या हुआ कि थम गईं तीन सांसें?
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दिल्ली से सटे साइबर सिटी गुरुग्राम के बाहरी इलाके में एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार के जुनून पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। पटौदी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लोकरा गांव के पास शुक्रवार की वह काली रात किसी के लिए आखिरी साबित होगी, इसका अंदाजा शायद वहां से गुजर रहे राहगीरों को भी नहीं था। यह मामला केवल एक सड़क दुर्घटना भर नहीं है, बल्कि उस अनियंत्रित ड्राइविंग के खौफनाक मंजर की तस्दीक करता है, जो पलक झपकते ही हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ देती है। सीसीटीवी फुटेज में कैद हुए इस मंजर ने न केवल स्थानीय प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी सुरक्षित सड़कों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।


तथ्यों की कड़ियों को जोड़ें तो यह पूरी घटना रात के सन्नाटे में तब शुरू हुई जब 60 वर्षीय सुभाष अपने दो मासूमों के साथ घर की ओर बढ़ रहे थे। दरअसल, स्कूल की छुट्टियों का आनंद लेने आए 10 साल के इशांत उर्फ सुल्तान और 8 साल के जैद खान अपने नाना के साथ वक्त बिताने के लिए भिवाड़ी से यहां आए थे। रात करीब साढ़े दस बजे का वक्त था और यह परिवार गांव की ही एक सड़क के किनारे से गुजर रहा था। सीसीटीवी की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि तीनों पूरी तरह सुरक्षित तरीके से किनारे पर थे, लेकिन तभी पीछे से मौत बनकर आई एक महिंद्रा थार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर की तीव्रता इतनी अधिक थी कि तीनों को संभलने का एक मौका तक नहीं मिला और घटनास्थल पर ही चीख-पुकार के बीच उनकी जीवनलीला समाप्त हो गई।


घटना के बाद का दृश्य और भी विचलित करने वाला था, जहां आरोपी चालक ने मानवता को शर्मसार करते हुए घायलों की मदद करने के बजाय अपनी गाड़ी वहीं छोड़ी और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश और स्थानीय लोगों के आक्रोश के बीच प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि चालक का गाड़ी पर से नियंत्रण पूरी तरह खो चुका था, जिसके चलते गाड़ी सड़क छोड़कर किनारे चल रहे लोगों पर चढ़ गई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए फरार आरोपी की तलाश शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर 25 वर्षीय दीपांशु को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की, जो पास के ही गोरियावास गांव का निवासी बताया जा रहा है।


इस पूरे हादसे ने लोकरा गांव की आबोहवा में एक गहरा सन्नाटा और शोक भर दिया है। अपनों को खोने का गम और इंसाफ की मांग के बीच पुलिस ने थार को अपने कब्जे में लेकर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है, लेकिन इस घटना ने उन माता-पिता के सामने कभी न खत्म होने वाला दुख खड़ा कर दिया है, जिनके बच्चे छुट्टियों में ननिहाल खुशियां मनाने आए थे। फिलहाल, पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या दुर्घटना के समय चालक किसी नशे में था या फिर यह महज ओवरस्पीडिंग का नतीजा है। आने वाले दिनों में आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाह ड्राइविंग पर लगाम कसी जा सके।

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