ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत ने लागू किया एस्मा(ESMA): प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए 'सप्लाई रेगुलेशन' आदेश जारी, जानें घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका असर
प्राकृतिक गैस संकट: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के मद्देनजर सरकार ने लागू किए आपातकालीन प्रावधान, घरेलू आपूर्ति को दी प्राथमिकता

ईरान और इजरायल (अमेरिका समर्थित) के मध्य गहराते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह चरमरा गई है। इस गंभीर वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए अनिवार्य सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) लागू करने की घोषणा की है। सरकार का यह सख्त फैसला वैश्विक आपूर्ति में आए व्यवधान के कारण देश के भीतर पैदा होने वाले संभावित गैस संकट को रोकने और घरेलू संसाधनों का विवेकपूर्ण प्रबंधन सुनिश्चित करने की दिशा में एक रक्षात्मक कवच के रूप में देखा जा रहा है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध की स्थिति में किसी भी प्रकार की जमाखोरी या आपूर्ति में बाधा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, ताकि आम जनजीवन और देश की अर्थव्यवस्था की गति प्रभावित न हो।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार ने 'प्राकृतिक गैस (सप्लाई रेगुलेशन) आदेश, 2026' को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है, जो तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू माना जाएगा। इस नए विधायी आदेश के तहत सरकार ने गैस वितरण की एक श्रेणीबद्ध प्राथमिकता सूची तैयार की है, जिसमें घरेलू उपयोग (PNG), परिवहन (CNG) और अन्य आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि युद्ध के चलते आयातित गैस की मात्रा में कमी आती है, तो भारत में उत्पादित होने वाली प्राकृतिक गैस का सबसे पहला हिस्सा उन क्षेत्रों को मिले जो सीधे तौर पर आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों से जुड़े हैं। इसके माध्यम से सरकार औद्योगिक और गैर-जरूरी वाणिज्यिक क्षेत्रों की तुलना में प्राथमिक क्षेत्रों के हितों की रक्षा करेगी, जिससे युद्ध के नकारात्मक आर्थिक प्रभाव को न्यूनतम स्तर पर सीमित किया जा सके।
यह महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही सक्रिय हो गया है, जो अधिकारियों को गैस आपूर्ति नेटवर्क पर कड़ा नियंत्रण रखने और विषम परिस्थितियों में वितरण को विनियमित करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है। सरकार की इस मुस्तैदी का एक बड़ा कारण भारत की आयात पर निर्भरता है, जो युद्ध प्रभावित समुद्री मार्गों (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) के कारण संकट में पड़ सकती है। ऐसे में 'सप्लाई रेगुलेशन' आदेश 2026 एक सुरक्षा ढांचे की तरह काम करेगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के दौर में भी भारतीय रसोईघरों और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में ईंधन की कमी न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि एस्मा लागू होने से न केवल आपूर्ति सुचारू रहेगी, बल्कि यह ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाली एजेंसियों को भी उत्तरदायी बनाए रखेगा ताकि संकट के समय में किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी या कालाबाजारी को पनपने का अवसर न मिले।
