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जबलपुर में 'राहुल' बनकर बुना गया धोखे का जाल, क्या एक साल तक छिपे उस चेहरे की हकीकत जानते हैं आप?

विश्वास के नाम पर शुरू हुई एक कहानी ने जब अपना नकाब उतारा, तो सामने आई रूह कपा देने वाली ब्लैकमेलिंग की साजिश।

जबलपुर में राहुल बनकर बुना गया धोखे का जाल, क्या एक साल तक छिपे उस चेहरे की हकीकत जानते हैं आप?
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मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर से एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है जिसने सामाजिक विश्वास और डिजिटल युग में बढ़ती पहचान की धोखाधड़ी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ओमती थाना क्षेत्र में घटी इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि किस तरह भावनाओं का फायदा उठाकर किसी के जीवन को अंधकार में धकेला जा सकता है। यह मामला महज एक साधारण अपराध नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित तरीके से रची गई उस साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है, जहां एक व्यक्ति ने अपनी पूरी वास्तविकता को ही एक काल्पनिक पर्दे के पीछे छिपा रखा था। एक साल तक चले इस कथित शोषण के पीछे छिपे चेहरों की सच्चाई जब उजागर हुई, तो न केवल पीड़िता बल्कि पूरे कानूनी तंत्र के सामने कई कड़वे सच सामने आ गए।


पीड़िता द्वारा प्रस्तुत किए गए विवरणों के अनुसार, यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब उसकी मुलाकात एक युवक से हुई जिसने खुद का परिचय 'राहुल' के रूप में दिया था। मधुर बातों और भविष्य के सुनहरे सपनों का झांसा देकर आरोपी ने युवती का विश्वास हासिल किया और शादी का वादा कर उसे अपने जाल में फंसा लिया। जांच में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि आरोपी अब्दुल फराज खान ने न केवल अपना नाम बदला, बल्कि अपनी वैवाहिक स्थिति को लेकर भी युवती को पूरी तरह अंधेरे में रखा। वह पहले से ही शादीशुदा था और दो बच्चों का पिता भी था, लेकिन उसने एक साल तक इस सच को अपने तक ही सीमित रखा। इस दौरान वह युवती को जबलपुर से बाहर अन्य शहरों में भी ले गया, जहां उसने कथित तौर पर नशीले पदार्थों का सहारा लेकर पीड़िता के साथ ज्यादती की और उसके कुछ बेहद निजी वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिए।


जैसे ही नियति ने इस धोखे की परतें हटाईं और पीड़िता को राहुल की असली पहचान अब्दुल फराज खान के रूप में पता चली, उसने तुरंत इस रिश्ते से किनारा करने का फैसला किया। हालांकि, सच्चाई सामने आने के बाद आरोपी का व्यवहार पूरी तरह बदल गया और वह ब्लैकमेलिंग के खतरनाक रास्ते पर उतर आया। पीड़िता का आरोप है कि अब्दुल ने उन निजी वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। लगातार मिल रही धमकियों और सामाजिक बदनामी के डर से पीड़िता इस कदर टूट चुकी थी कि उसने अपने जीवन को समाप्त करने जैसा घातक कदम उठाने के बारे में भी सोच लिया था। लेकिन इस नाजुक मोड़ पर कुछ कानूनविदों के परामर्श और उचित मार्गदर्शन ने उसे टूटने से बचा लिया और उसने कानूनी लड़ाई लड़ने का साहस जुटाया।


पुलिस प्रशासन ने इस गंभीर शिकायत को संज्ञान में लेते हुए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की और आरोपी अब्दुल फराज खान, जो कि पुराने बस स्टैंड इलाके का रहने वाला है, को अपनी हिरासत में ले लिया है। ओमती पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी ने पहले भी किसी और को इसी तरह अपना शिकार बनाया है या नहीं। पीड़िता के बयानों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस कड़ियां जोड़ रही है ताकि आरोपी को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके। इस घटना ने एक बार फिर समाज में आपसी पहचान की पुष्टि और किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा करने के खतरों को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

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