कपूर परिवार के संपत्ति विवाद में नया मोड़, दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रिया कपूर को भेजा नोटिस, मोबाइल जब्ती पर सख्ती
संजय कपूर की वसीयत और डिजिटल सबूतों की जांच पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त

कपूर बनाम कपूर केस में हाईकोर्ट की कड़ी कार्रवाई
कपूर परिवार के बहुचर्चित संपत्ति विवाद मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम कदम उठाते हुए प्रिया कपूर को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस संजय कपूर की कथित वसीयत और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच से संबंधित है। अदालत ने संजय कपूर, प्रिया कपूर और वसीयत के डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े अन्य व्यक्तियों के मोबाइल फोन जब्त किए जाने के मुद्दे पर स्पष्ट जवाब मांगा है। इस आदेश के बाद मामले ने एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है।
कॉल डेटा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग पर भी नोटिस
दिल्ली हाईकोर्ट के संयुक्त रजिस्ट्रार ने करिश्मा कपूर के बच्चों की ओर से दायर नई याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया है। इन याचिकाओं में संजय कपूर के कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि तकनीकी नियमों के तहत कॉल रिकॉर्ड एक निश्चित अवधि के बाद अपने आप डिलीट हो जाते हैं, ऐसे में अगर समय रहते इन्हें संरक्षित नहीं किया गया तो महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो सकते हैं।
तत्काल सुनवाई की मांग, सबूत मिटने का खतरा बताया
करिश्मा कपूर के बच्चों ने अदालत से इस मामले में तुरंत सुनवाई करने का आग्रह किया। उनकी दलील है कि कॉल डेटा रिकॉर्ड आमतौर पर एक साल के भीतर हट जाते हैं, जिससे केस से जुड़े अहम तथ्य हमेशा के लिए खत्म हो सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने अदालत से जल्द हस्तक्षेप की मांग की, ताकि डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके।
प्रिया कपूर की ओर से दलील, रिकॉर्ड को बताया अविश्वसनीय
वहीं प्रिया कपूर की तरफ से पेश हुए वकील ने अदालत में दावा किया कि जिन कॉल डेटा रिकॉर्ड रिपोर्ट्स पर भरोसा किया जा रहा है, वे पहले ही डिलीट हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो दस्तावेज पेश किए जा रहे हैं, वे न सिर्फ अविश्वसनीय हैं बल्कि कथित तौर पर फर्जी भी हो सकते हैं। इस दलील के जरिए प्रिया कपूर ने डिजिटल जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
हाईकोर्ट का सख्त रुख, समय बढ़ाने की मांग खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रिया कपूर को दो सप्ताह के भीतर अपना लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने उनके वकीलों की ओर से अधिक समय मांगे जाने की याचिका को खारिज कर दिया। इससे साफ है कि कोर्ट इस मामले में देरी के पक्ष में नहीं है। अगली सुनवाई की तारीख 26 फरवरी तय की गई है, जहां इस विवाद से जुड़े अहम पहलुओं पर चर्चा होगी।

