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सोशल मीडिया पर छाई उस चर्चित शादी का गहरा राज: जांच में 'मोनालिसा' की उम्र ने पलट दी पूरी कहानी

दस्तावेजों की पड़ताल के बाद कानून के शिकंजे में आया 'फरमान', राष्ट्रीय आयोग की रिपोर्ट ने दावों को किया धराशायी।

सोशल मीडिया पर छाई उस चर्चित शादी का गहरा राज: जांच में मोनालिसा की उम्र ने पलट दी पूरी कहानी
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सोशल मीडिया के गलियारों में जिस एक विवाह की तस्वीरों और वीडियो ने लाखों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था, वह अब कानूनी पेचीदगियों और बेहद गंभीर आरोपों के भंवर में फंस गया है। 'मोनालिसा' के नाम से चर्चित हुई उस युवती की शादी, जिसे अब तक प्रेम और आपसी सहमति का एक बड़ा उदाहरण मानकर इंटरनेट पर प्रचारित किया जा रहा था, उसकी वास्तविकता अब सरकारी फाइलों में कुछ और ही बयां कर रही है। राष्ट्रीय जनजाति आयोग (NCST) की एक उच्चस्तरीय जांच ने इस पूरे मामले की बुनियाद को हिलाकर रख दिया है। आयोग की सक्रियता और दस्तावेजों की गहन छानबीन के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि जिस लड़की को बालिग बताकर यह विवाह संपन्न कराया गया था, कानून की नजर में उसकी आयु शादी के योग्य नहीं थी।


इस पूरे प्रकरण में नया मोड़ तब आया जब राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के निर्देशन में एक विशेष जांच दल ने स्थानीय रिकॉर्ड्स और जन्म संबंधी प्रमाण पत्रों की पड़ताल शुरू की। जांच की रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। दस्तावेजों के अनुसार, विवाह के समय लड़की की आयु महज 16 वर्ष और 2 महीने पाई गई, जो उसे कानूनी रूप से नाबालिग की श्रेणी में खड़ा करती है। इस खुलासे ने उन तमाम दावों को खारिज कर दिया है, जिसमें युवती के वयस्क होने की बात कही गई थी। आयोग की इस रिपोर्ट ने न केवल सामाजिक बहस छेड़ दी है, बल्कि मामले को पूरी तरह से आपराधिक दायरे में लाकर खड़ा कर दिया है, जिससे अब इस चर्चित विवाह की वैधता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।


जांच के निष्कर्षों के आधार पर प्रशासन ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मध्य प्रदेश के महेश्वर थाने में आरोपी पति, फरमान के खिलाफ संगीन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा कायम किया है। कानून के जानकारों का मानना है कि यह मामला अब केवल एक वैवाहिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसमें एक नाबालिग के अधिकारों के हनन और संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन का गंभीर पहलू जुड़ गया है। स्थानीय लोगों और इस मामले पर नजर रखने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं, जबकि पुलिस अब आगे की कानूनी कार्यवाही में जुट गई है।

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