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54 साल बाद चंद्रमा की दहलीज पर इंसान, क्या अंतरिक्ष से आने वाली तस्वीरें बदल देंगी दुनिया का नजरिया?

फ्लोरिडा से उड़े ओरियन कैप्सूल में मौजूद चार यात्रियों के पास है एक ऐसी चीज, जो पहले कभी किसी मिशन का हिस्सा नहीं रही!

54 साल बाद चंद्रमा की दहलीज पर इंसान, क्या अंतरिक्ष से आने वाली तस्वीरें बदल देंगी दुनिया का नजरिया?
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दशकों के इंतजार और अंतरिक्ष विज्ञान की अनगिनत कोशिशों के बाद आज तड़के फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से एक ऐसी गर्जना हुई, जिसने पूरी दुनिया को आसमान की ओर देखने पर मजबूर कर दिया है। नासा का महत्वाकांक्षी आर्टेमिस II मिशन सुबह 3 बजकर 58 मिनट पर अंतरिक्ष की गहराइयों में समा गया, जो आधी सदी से भी अधिक समय के बाद इंसानों को चंद्रमा के करीब ले जाने वाला पहला अभियान बन गया है। साल 1972 के अपोलो 17 मिशन के बाद यह पहली बार है जब मानव जाति पृथ्वी की कक्षा छोड़कर फिर से अपने पड़ोसी उपग्रह की ओर रुख कर रही है। हालांकि, यह उड़ान केवल एक वैज्ञानिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष अन्वेषण के एक ऐसे नए युग की आहट है जो तकनीकी रूप से पिछले सभी अभियानों से बिल्कुल अलग और अधिक आधुनिक होने वाला है।


इस 10 दिवसीय साहसिक सफर पर निकले ओरियन कैप्सूल के अंदर तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री सवार हैं, जिनकी भूमिका केवल पायलट की नहीं बल्कि भविष्य के 'मून बेस' के अग्रदूतों की है। यह मिशन भले ही सीधे चंद्रमा की सतह पर कदम रखने का नहीं है, लेकिन इसकी बारीकियां काफी पेचीदा हैं, जिसमें यात्री चंद्रमा की कक्षा में पूरे 24 घंटे का समय बिताएंगे। इस दौरान वे गहन परीक्षण करेंगे कि क्या मौजूदा तकनीक इंसानों को भविष्य में चांद पर लंबे प्रवास के लिए सुरक्षित रख सकती है। यह अभियान दरअसल उस नींव को तैयार कर रहा है जहाँ आने वाले समय में मनुष्य न केवल चांद पर उतरेगा बल्कि वहां अपनी बस्तियां बनाने और वैज्ञानिक प्रयोगों को लंबी अवधि तक चलाने की क्षमता विकसित करेगा।


इस बार के मिशन में जो बात सबसे ज्यादा चर्चा बटोर रही है और जो इसे पहले के सभी अभियानों से मानवीय स्तर पर जोड़ती है, वह है अंतरिक्ष यात्रियों के हाथों में मौजूद 'स्मार्टफोन'। अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में संभवतः पहली बार नासा ने अपने यात्रियों को निजी स्मार्टफोन साथ ले जाने की इजाजत दी है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिहाज से एक बड़ा और दिलचस्प बदलाव माना जा रहा है। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड इसाकमैन द्वारा सोशल मीडिया के जरिए साझा की गई इस जानकारी ने जनता के बीच भारी उत्सुकता पैदा कर दी है। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष की उस निर्वात शांति के बीच यात्रियों को अपने परिवारों के साथ उन जज्बाती पलों को सहेजने का मौका देना है, जिन्हें वे भविष्य में पूरी दुनिया के साथ साझा कर सकें।


स्मार्टफोन का इस्तेमाल केवल निजी यादों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह उम्मीद की जा रही है कि इस बार अंतरिक्ष से जो दृश्य और वीडियो पृथ्वी पर आएंगे, उनकी गुणवत्ता और नजरिया पेशेवर कैमरों से बिल्कुल अलग और अधिक जीवंत होगा। इन उपकरणों के जरिए अंतरिक्ष यात्री उन छोटे-छोटे पलों और अनुभवों को भी रिकॉर्ड कर सकेंगे जो अक्सर आधिकारिक फुटेज में छूट जाते हैं। यह पहल अंतरिक्ष विज्ञान को आम जनमानस के लिए और अधिक प्रेरक और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम देखी जा रही है। आर्टेमिस II का यह सफर अब महज एक मशीनी प्रक्रिया न रहकर एक मानवीय गाथा बनने की ओर बढ़ रहा है, जिसके हर अपडेट पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

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