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नोएडा कार हादसा: “बेटा छत पर लेटा मदद मांगता रहा”, रेस्क्यू में लापरवाही का पिता ने लगाया आरोप

नोएडा हादसे में इंजीनियर की मौत पर पिता का दर्द छलका, रेस्क्यू सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

नोएडा कार हादसा: “बेटा छत पर लेटा मदद मांगता रहा”, रेस्क्यू में लापरवाही का पिता ने लगाया आरोप
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नोएडा के ग्रेटर नोएडा इलाके में हुए दर्दनाक कार हादसे के बाद अब मृत युवक के पिता का भावुक और झकझोर देने वाला बयान सामने आया है। इस हादसे में जान गंवाने वाले इंजीनियर के पिता ने प्रशासनिक व्यवस्था और रेस्क्यू सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अगर समय पर सही तरीके से राहत कार्य किया जाता, तो उनके बेटे की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि हादसे के वक्त उनका बेटा पूरी तरह होश में था और लगातार मदद की गुहार लगा रहा था, लेकिन मौके पर पहुंचे बचाव दल के पास पर्याप्त साधन मौजूद नहीं थे।

पीड़ित पिता के अनुसार, यह घटना रात करीब 12 बजे की है, जब उनके बेटे ने फोन कर बताया कि उसकी कार फिसलकर सड़क किनारे बने गहरे नाले में जा गिरी है। उसने बताया कि वह गाड़ी के अंदर फंसा हुआ है और पानी तेजी से भर रहा है। कुछ ही देर में हालात बिगड़ने लगे, जिसके बाद वह किसी तरह कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर चढ़ गया। पिता ने बताया कि बेटा फोन पर लगातार कह रहा था कि गाड़ी धीरे-धीरे डूब रही है और उसे जल्द से जल्द बचाने की जरूरत है।

सूचना मिलते ही पिता तुरंत घटनास्थल की ओर रवाना हो गए, लेकिन अंधेरा और इलाके की सही पहचान न होने के कारण यह तय करने में करीब 30 से 40 मिनट लग गए कि युवक किस नाले में फंसा है। इस पूरे समय पिता और बेटे के बीच मोबाइल फोन पर संपर्क बना रहा। बेटा लगातार अपनी लोकेशन समझाने की कोशिश करता रहा और पहचान के लिए मोबाइल की टॉर्च भी जलाए रखी, जिससे दूर से हल्की रोशनी दिखाई दे रही थी। पिता के मुताबिक करीब दो घंटे तक उनका बेटा अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष करता रहा।

रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पिता का आरोप है कि मौके पर पहुंची सरकारी रेस्क्यू टीम सिर्फ एक रस्सी लेकर आई थी और उसी के सहारे बचाने का प्रयास किया गया। जब यह तरीका कारगर साबित नहीं हुआ, तब भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। न तो नाव की व्यवस्था थी, न प्रशिक्षित तैराक मौजूद थे और न ही किसी आधुनिक उपकरण का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि यदि टीम के पास पर्याप्त संसाधन होते या तुरंत दूसरा विकल्प अपनाया जाता, तो उनके बेटे को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता था।

इस हादसे ने एक बार फिर शहरी इलाकों में आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि घटना के दौरान समय सबसे अहम था, लेकिन वही सबसे ज्यादा बर्बाद हुआ। फिलहाल मामले को लेकर प्रशासन की ओर से जांच की बात कही जा रही है, जबकि परिवार न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहा है। इस घटना ने न केवल एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता और तत्परता पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है।

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