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नोएडा में एमबीए छात्र के साथ हुआ करोड़ों का खेल, क्या आपके फोन पर भी आया है ऐसा 'गोल्डन लिंक'?

घर बैठे कमाई के लुभावने वादों ने छात्र को पहुंचाया अर्श से फर्श पर, जांच में जुटी साइबर सेल।

नोएडा में एमबीए छात्र के साथ हुआ करोड़ों का खेल, क्या आपके फोन पर भी आया है ऐसा गोल्डन लिंक?
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ग्रेटर नोएडा वेस्ट के एक पॉश इलाके में रहने वाले एमबीए के छात्र को शायद अंदाजा भी नहीं था कि उसके मोबाइल स्क्रीन पर चमकता एक साधारण सा लिंक उसकी जमापूंजी और भविष्य की उम्मीदों को लील जाएगा। डिजिटल इंडिया के दौर में पढ़ाई और काम के बीच तालमेल बिठा रहा यह युवा उस वक्त एक शातिर चक्रव्यूह में फंस गया, जब उसने महज एक क्लिक के जरिए 'बड़े मुनाफे' की दुनिया में कदम रखा। यह मामला सिर्फ एक आर्थिक अपराध भर नहीं है, बल्कि यह उस मनोवैज्ञानिक जाल की कहानी है जिसे साइबर ठगों ने बड़ी बारीकी से बुना था। नामी कंपनियों के फर्जी प्रतिनिधि बनकर आए इन अपराधियों ने भरोसे की ऐसी बुनियाद रखी कि एमबीए की पढ़ाई कर रहा छात्र भी उनकी चाल को भांपने में पूरी तरह नाकाम रहा।


शुरुआत महज एक एप डाउनलोड करने और मामूली निवेश से हुई थी, जहां ठगों ने छात्र को यह विश्वास दिलाया कि उनका प्लेटफॉर्म शेयर बाजार और आईपीओ (IPO) ट्रेडिंग का एक प्रमाणित और रजिस्टर्ड जरिया है। अपनी साख जमाने के लिए जालसाजों ने पहले करीब 50 हजार रुपये का निवेश कराया और फिर एक फर्जी इंटरफेस के जरिए उस पर मोटा मुनाफा दिखाकर छात्र का लालच और विश्वास दोनों जीत लिया। स्क्रीन पर बढ़ते हुए अंकों को देखकर छात्र को लगा कि वह आर्थिक आजादी की राह पर है, जिसके बाद उसने महज एक हफ्ते के भीतर अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती कर दी। 5 मार्च से 12 मार्च के बीच किस्तों में उसने अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई के लगभग 91.5 लाख रुपये उन खातों में ट्रांसफर कर दिए, जिनका नियंत्रण अनजान हाथों में था।


असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब छात्र ने अपनी कथित 'कमाई' को बैंक खाते में लाने की कोशिश की। शुरू में तकनीकी बहाने बनाकर उसे टाला गया, लेकिन बाद में जालसाजों ने 'कैपिटल गेन टैक्स' का एक नया कार्ड खेला। 30 मार्च को एक महिला कॉलर ने उससे टैक्स के नाम पर 5.75 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की, जिसने छात्र के मन में संदेह का बीज बो दिया। जब उसने उस टैक्स भुगतान के लिंक और संबंधित संस्थान की गहराई से पड़ताल की, तो पता चला कि जिस दुनिया को वह हकीकत मान रहा था, वह दरअसल एक डिजिटल छलावा थी। अब पीड़ित छात्र ने साइबर पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस इस पूरे सिंडिकेट और पैसों के ट्रेल को खंगालने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस खेल के तार कहां तक जुड़े हैं।

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