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ओडिशा के पाताला गांव में उत्सव की तैयारी बनी मातम, आखिर ऊपर से गुजरती उस लाइन ने कैसे छीनी खुशियां?

परंपरा और आस्था के आयोजन से पहले पसरा सन्नाटा, लोहे के पाइप और हाई-वोल्टेज तार के मेल ने मचाई तबाही।

ओडिशा के पाताला गांव में उत्सव की तैयारी बनी मातम, आखिर ऊपर से गुजरती उस लाइन ने कैसे छीनी खुशियां?
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ओडिशा के ढेंकानाल जिले में एक धार्मिक आयोजन की उमंग उस वक्त गहरे शोक में तब्दील हो गई, जब एक अप्रत्याशित हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। हिंदोल ब्लॉक के बालिमी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पाताला गांव में रविवार की शाम कुछ ऐसी घटी जिसने सुरक्षा इंतजामों और बिजली लाइनों की ऊंचाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव में क्षेत्र की प्रसिद्ध और पारंपरिक 'दंड यात्रा' की तैयारियां अपने चरम पर थीं और स्थानीय युवक पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम स्थल को अंतिम रूप देने में जुटे थे। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि खुशी का यह माहौल पलक झपकते ही चीख-पुकार में बदल जाएगा।


हादसे की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि गांव के कुछ युवक उत्सव के लिए टेंट लगाने का काम कर रहे थे। इसी दौरान जब वे टेंट के ढांचे को सहारा देने के लिए लोहे के एक लंबे पाइप को खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे, तभी वह पाइप अनजाने में ऊपर से गुजर रही 11 केवी की हाई-वोल्टेज बिजली लाइन के संपर्क में आ गया। धातु का पाइप होने के कारण बिजली का करंट बिजली की गति से नीचे की ओर दौड़ा, जिसकी चपेट में वहां मौजूद पांच युवक आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झटका इतना जोरदार था कि युवकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और पूरा इलाका एक खौफनाक सन्नाटे में डूब गया।


इस हृदय विदारक घटना में सुधाकर साहू, पिंटू साहू और मिलन महालिक नामक तीन होनहार युवकों की मौके पर ही सांसें थम गईं। इन तीनों की पहचान उन सक्रिय युवाओं के रूप में हुई है जो गांव के हर सामाजिक और धार्मिक कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिजली के संपर्क में आते ही तीनों ने तत्काल दम तोड़ दिया, जबकि उनके साथ काम कर रहे दो अन्य साथी बुरी तरह झुलस गए। ग्रामीणों ने आनन-फानन में बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को पास के चिकित्सा केंद्र पहुंचाया, जहां उनकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया है।


प्रशासन और पुलिस की टीम ने सूचना मिलते ही घटनास्थल का मुआयना किया और शवों को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। गांव वालों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश और दुख है; स्थानीय लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाकों और आयोजन स्थलों के ऊपर से गुजरने वाले बिजली के तारों की ऊंचाई को लेकर अक्सर चिंताएं जताई जाती रही हैं। फिलहाल, पूरे पाताला गांव में मातम पसरा है और जिस 'दंड यात्रा' के लिए लोग एकजुट हो रहे थे, अब वहां केवल सिसकियां सुनाई दे रही हैं। पुलिस इस मामले की तकनीकी जांच भी कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुरक्षा मानकों में कहां चूक हुई।

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