करोड़ों के कैश मैनेजमेंट सिस्टम में सेंध: आखिर कहां ओझल हो गई एटीएम में भरने वाली मोटी रकम?
बैंकों के एटीएम में नकदी डालने वाली एजेंसी के दावों और हकीकत के बीच गहरे फासले ने सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े किए बड़े सवाल।

आंध्र प्रदेश के पालनाडु जिले में सुरक्षा और भरोसे को ताक पर रखकर अंजाम दी गई एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने कैश मैनेजमेंट सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिडुगुराल्ला कस्बे में वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी एक प्रतिष्ठित कंपनी के भीतर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब लाखों की नकदी के साथ-साथ उसे संभालने वाला शख्स भी अचानक रहस्यमयी तरीके से ओझल हो गया। यह मामला किसी सामान्य चूक का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित विश्वासघात की ओर इशारा कर रहा है, जहां बैंक और जनता के बीच की कड़ी बनने वाली व्यवस्था खुद ही शिकार हो गई। शुरुआती जांच के दौरान जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे इशारा कर रहे हैं कि कैसे एक व्यक्ति की मंशा ने पूरी सुरक्षा प्रणाली को ठेंगा दिखा दिया।
इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा तब हुआ जब सीएमएस (CMS) कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने पिडुगुराल्ला क्षेत्र के एटीएम में मौजूद नकदी का रूटीन ऑडिट शुरू किया। ऑडिट की प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई जब हिसाब-किताब में 87 लाख रुपये की एक बड़ी राशि का मिलान नहीं हो पाया। जांच को आगे बढ़ाने पर पता चला कि यह वह रकम थी जिसे अलग-अलग बैंकों के एटीएम काउंटरों में जमा किया जाना था, लेकिन हकीकत में वह पैसा मशीन तक पहुंचा ही नहीं। लापता हुई इस भारी-भरकम राशि के साथ ही कंपनी का एक कर्मचारी, जिसकी पहचान नरेश के रूप में हुई है, भी गायब मिला। जब उससे संपर्क साधने की कोशिश की गई, तो उसका मोबाइल फोन बंद पाया गया, जिससे संदेह पुख्ता हो गया कि यह कोई तकनीकी गलती नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है।
स्थानीय सूत्रों और पुलिस द्वारा जुटाए गए विवरण के अनुसार, गायब हुई नकदी का एक बड़ा हिस्सा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के तीन एटीएम और सेंट्रल बैंक के एक एटीएम के लिए आवंटित था। इन मशीनों में नकदी लोड करने की जिम्मेदारी आरोपी कर्मचारी को सौंपी गई थी, लेकिन उसने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय कथित तौर पर पूरे 87 लाख रुपये अपनी जेब में डाल लिए और फरार हो गया। इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब कंपनी ने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज सौंपे, जिनमें संदिग्ध कर्मचारी को संदिग्ध परिस्थितियों में नकदी के साथ वहां से निकलते हुए देखा जा सकता है। यह फुटेज अब जांच का सबसे अहम हिस्सा बन गया है, जो कर्मचारी की संलिप्तता की पुष्टि कर रहा है।
पिडुगुराल्ला पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया है और आरोपी की तलाश में कई टीमें गठित की हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल चोरी का नहीं बल्कि विश्वास के उल्लंघन का भी है, क्योंकि कैश मैनेजमेंट जैसी संवेदनशील नौकरियों में कर्मचारियों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और निगरानी अत्यंत आवश्यक होती है। पुलिस फिलहाल आरोपी के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है और उसके कॉल रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है ताकि उसकी लोकेशन का पता लगाया जा सके। इस वारदात ने न केवल संबंधित कंपनी के प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर बैंकों की कैश लोडिंग प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं पैदा कर दी हैं।
