सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में पीएम मोदी की भागीदारी, शौर्य यात्रा से जनसभा तक ऐतिहासिक संदेश
सोमनाथ पहुंचे पीएम मोदी, शौर्य यात्रा में हुए शामिल, मंदिर दर्शन के बाद जनसभा को करेंगे संबोधित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के सोमनाथ पहुंचे, जहां उन्होंने ऐतिहासिक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लिया। इस अवसर पर पीएम मोदी सुबह आयोजित शौर्य यात्रा में शामिल हुए। यह शौर्य यात्रा एक औपचारिक और प्रतीकात्मक शोभा यात्रा है, जिसका उद्देश्य सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले अनगिनत वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करना है। इस यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकाला गया, जिसे साहस, पराक्रम और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। शौर्य यात्रा में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, साधु-संतों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता देखने को मिली।
शौर्य यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने विधिवत दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात वह सोमनाथ में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि अपने संबोधन में पीएम मोदी भारत की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और राष्ट्र की ऐतिहासिक चेतना से जुड़े विषयों पर जोर देंगे। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के माध्यम से देश की भावी पीढ़ियों को अपने इतिहास, परंपराओं और आत्मसम्मान की भावना से जोड़ने का संदेश दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शुरुआत 8 जनवरी से हुई थी। यह आयोजन उन असंख्य भारतीय नागरिकों और योद्धाओं की स्मृति में किया जा रहा है, जिन्होंने सदियों पहले सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। यह पर्व विशेष रूप से 1026 ईस्वी में महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण की 1,000वीं वर्षगांठ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में आयोजित किया गया है। आयोजन का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक चेतना, स्वाभिमान और संघर्ष गाथा को जीवंत रखना है।
इसी कड़ी में गुजरात के राजकोट में भी बड़े स्तर पर औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियां प्रस्तावित हैं। यहां 1,800 से अधिक कारोबारी बैठकों का आयोजन तय किया गया है, जिनमें देश की कई प्रमुख कॉरपोरेट कंपनियां भाग लेंगी। इस सम्मेलन में टोरेंट पावर लिमिटेड, अदाणी ग्रीन, एस्सार समूह, नायरा एनर्जी, कोसोल, ज्योति सीएनसी समेत कई नामी उद्योग समूह शामिल होंगे। इसके अलावा 400 से अधिक प्रदर्शक कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य पालन, रक्षा, ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल, इंजीनियरिंग, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगे, जिससे निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
