रांची में इंदौर जैसे हालात की आहट, क्या दूषित पानी के खतरे को दूर करने में सक्षम है राजधानी?
प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक की पड़ताल में खुलासा, नालियों से गुजरकर घरों तक पहुंच रहा पीने का पानी, सैकड़ों इलाके जोखिम में

प्रतिष्ठित दैनिक अखबार हिंदुस्तान की पड़ताल ने रांची में पेयजल व्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी सामने रखी है. हालात ऐसे बनते जा रहे हैं, जो हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर में सामने आए जल संकट से मिलते जुलते नजर आ रहे हैं. इंदौर में दूषित पेयजल के कारण कई लोगों की मौत और बड़ी संख्या में बीमार होने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था. अब वैसा ही खतरा रांची की आबादी पर भी मंडराता दिख रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, रांची के 321 से अधिक इलाकों में फटी और जर्जर पाइपलाइन के जरिए जलापूर्ति की जा रही है. इनमें बड़ी संख्या में मलिन बस्तियां और घनी आबादी वाले मोहल्ले शामिल हैं. इन इलाकों में लोगों तक पहुंचने वाला पानी नालियों और गंदे जल प्रवाह के बीच से होकर गुजरता है, जिससे इसके दूषित होने की आशंका लगातार बनी रहती है.
अखबार की पड़ताल बताती है कि शहर के कई हिस्सों में अब तक मिसिंग पाइपलाइन बिछाई ही नहीं गई है. नतीजतन, लोग राइजिंग मेन पाइप से सीधे कनेक्शन लेने को मजबूर हैं. इन कनेक्शनों के लिए पतली पाइप नालियों के सहारे घरों तक पहुंचाई जाती हैं. लंबे समय तक गंदे पानी और सीवेज के संपर्क में रहने से ये पाइप कमजोर हो जाती हैं और उनमें छोटे छोटे छिद्र बन जाते हैं, जिनसे नालियों की गंदगी सीधे पेयजल में मिल जाती है.
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे पानी में माइक्रो बैक्टीरिया, ई-कोलाइ और भारी धातुओं की मौजूदगी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है. उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन और आंतों से जुड़ी बीमारियां इसी तरह के दूषित पानी से फैलती हैं. इंदौर में भी सीवेज लाइन में रिसाव के चलते ऐसा ही संकट पैदा हुआ था, जिसके परिणाम बेहद गंभीर रहे.
हाल ही में थड़पखना इलाके में सामने आया मामला इस खतरे को और पुख्ता करता है. वहां घरों में दूषित पानी आने की शिकायत के बाद जांच में पाया गया कि बैटरी दुकानों से गिरने वाला एसिड पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा रहा था. इससे जहरीले तत्व पानी में घुलकर घरों तक पहुंच रहे थे. विभागीय टीम ने तत्काल कुछ पाइप बदले और संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की.
अखबार की रिपोर्ट में रातू रोड, किशोरगंज, पुरानी रांची, लोहराकोचा, कोकर, चुटिया, हिंदपीढ़ी और अरगोड़ा के निचले इलाकों समेत कई मोहल्लों का जिक्र है, जहां जर्जर पाइपलाइन के सहारे जलापूर्ति हो रही है. इन इलाकों में रहने वाले लोग लंबे समय से इसी पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं.
वहीं पेयजल विभाग का दावा है कि जलशोधन केंद्रों से टंकियों तक भेजा जाने वाला पानी मानकों के अनुरूप होता है और नियमित जांच की जाती है. हालांकि जमीनी स्तर पर लीकेज, क्षतिग्रस्त पाइप और अव्यवस्थित कनेक्शनों की समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है.
हिंदुस्तान की इस पड़ताल ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रांची भी इंदौर जैसी किसी बड़ी स्वास्थ्य आपदा की ओर बढ़ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन नेटवर्क की मरम्मत, बदलावा और निगरानी नहीं की गई, तो राजधानी को भी दूषित पेयजल से उपजे गंभीर हालात का सामना करना पड़ सकता है.
