मकर संक्रांति 2026: सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से खत्म होता है खरमास, शुरू होते हैं मांगलिक कार्य
मकर संक्रांति पर सूर्य-शनि के मिलन, ऋतु परिवर्तन और दान-पुण्य का विशेष धार्मिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत शुभ और पावन माना जाता है। पौष मास में जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वही दिन होता है जब सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर यानी मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस खगोलीय परिवर्तन को केवल ज्योतिषीय घटना ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इसी कारण मकर संक्रांति को देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है—कहीं इसे उत्तरायण कहा जाता है तो कहीं खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है।
मकर संक्रांति के साथ ही सूर्य की उत्तरायण गति प्रारंभ हो जाती है, जिसे सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन से एक माह तक चलने वाला खरमास समाप्त हो जाता है, जिसके कारण विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ संस्कारों पर लगी रोक हट जाती है। धार्मिक मान्यता है कि सूर्य के उत्तरायण होने से देवताओं का दिन आरंभ होता है, इसलिए यह काल शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल माना गया है। इसी वजह से मकर संक्रांति के बाद मांगलिक आयोजनों में तेजी देखने को मिलती है।
इस पर्व का संबंध प्रकृति और ऋतु परिवर्तन से भी गहराई से जुड़ा है। मकर संक्रांति के बाद धीरे-धीरे सर्दियों का प्रभाव कम होने लगता है और वसंत ऋतु की आहट महसूस होने लगती है। दिन बड़े होने लगते हैं और सूर्य की किरणों में गर्माहट बढ़ जाती है। कृषि प्रधान भारत में यह परिवर्तन किसानों के लिए भी खास महत्व रखता है, क्योंकि यह नई फसलों और नई शुरुआत का संकेत देता है।
धार्मिक दृष्टि से मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्य की विशेष उपासना का विधान है। माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। खास तौर पर खिचड़ी, तिल, गुड़, दाल और अन्न का दान करने की परंपरा प्रचलित है। खिचड़ी का सेवन और दान न केवल धार्मिक बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी माना जाता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति को आस्था, परंपरा और प्रकृति के संतुलन का पर्व कहा जाता है।
