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समस्तीपुर: दिल्ली में पिता लड़ रहे थे जिंदगी की जंग, पीछे गांव में एक खामोश 'रिवर्स' ने उजाड़ दीं खुशियां

सगमा टोला में सुबह के सन्नाटे को चीर गई चीखें, लापरवाही और नियति के क्रूर खेल के बीच एक परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़।

समस्तीपुर: दिल्ली में पिता लड़ रहे थे जिंदगी की जंग, पीछे गांव में एक खामोश रिवर्स ने उजाड़ दीं खुशियां
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बिहार के समस्तीपुर जिले के अंगारघाट थाना क्षेत्र में एक ऐसा हादसा हुआ है, जिसने सुरक्षा मानकों और मानवीय संवेदनाओं पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। चैता दक्षिणी पंचायत के सगमा टोला में गुरुवार की सुबह उस वक्त मातम में बदल गई, जब खेल-कूद में मशगूल एक मासूम की जिंदगी अचानक काल के गाल में समा गई। यह घटना महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार की कमर तोड़ने वाली त्रासदी है जो पहले से ही नियति की मार झेल रहा था। घटना की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस वक्त मासूम की सांसें उखड़ रही थीं, उसके माता-पिता सैकड़ों मील दूर अस्पताल की चौखट पर जीवन की दुआ मांग रहे थे, पर उन्हें क्या पता था कि उनके घर का चिराग पीछे बुझ चुका है।


विस्तृत जानकारी के अनुसार, 6 वर्षीय अभिषेक कुमार अपने घर के आंगन और दरवाजे के पास खेल रहा था। इसी दौरान गांव में चलने वाली एक निजी स्कूल की वैन वहां पहुंची। चश्मदीदों का कहना है कि वैन चालक ने बिना पीछे देखे और बिना किसी सहायक की मदद लिए गाड़ी को तेजी से रिवर्स करना शुरू कर दिया। इस भीषण लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि नन्हा अभिषेक वाहन के पहियों की चपेट में आ गया। चालक की इस चूक ने मासूम को संभलने का मौका तक नहीं दिया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने आनन-फानन में बच्चे को उठाया और लहूलुहान हालत में समस्तीपुर सदर अस्पताल लेकर भागे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया, जिससे वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।


इस हादसे के पीछे की पृष्ठभूमि और भी हृदयविदारक है। मृतक अभिषेक के पिता, नीरज कुमार राय, इन दिनों कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं और उनका इलाज दिल्ली के एम्स अस्पताल में चल रहा है। जिस वक्त गांव में यह कहर टूटा, नीरज की पत्नी अपने बीमार पति की देखभाल के लिए दिल्ली में ही मौजूद थीं। बेटे की मौत की खबर मिलते ही बीमार पिता की हालत और भी नाजुक हो गई है, वहीं मां का कलेजा फट पड़ा है। वह दिल्ली से गांव के लिए रवाना तो हो गई हैं, लेकिन उनका यह सफर उनकी जिंदगी का सबसे कठिन और दुखद सफर बन गया है। गांव के लोग इस वक्त शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों में स्कूल वैन के लापरवाह संचालन को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है।

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