सिक्किम की धरती में मची रहस्यमयी हलचल: क्या हिमालयी बेल्ट में बड़े खतरे की आहट है?
बार-बार कांपते पहाड़ और दहशत में लोग, क्या कह रहे हैं भू-वैज्ञानिक?

पूर्वोत्तर भारत के खूबसूरत राज्य सिक्किम में पिछले कुछ घंटों से कुदरत के बदलते मिजाज ने न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि भू-वैज्ञानिकों के बीच भी एक बड़ी चर्चा छेड़ दी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में एक के बाद एक महसूस किए गए झटकों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हिमालय की गोद में बसी इस भूमि के नीचे कोई बड़ा भूगर्भीय परिवर्तन आकार ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में शनिवार की रात करीब 8:41 बजे मंगन जिले में जमीन के भीतर हलचल हुई, जिसका केंद्र सतह से 14 किलोमीटर गहराई में स्थित था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र द्वारा रिक्टर स्केल पर इस कंपन की तीव्रता 4.1 मापी गई है। रात के सन्नाटे में अचानक हुए इस कंपन से लोग सहम गए और अपनी जान बचाने के लिए कड़कड़ाती ठंड के बावजूद घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रारंभिक राहत की खबर देते हुए पुष्टि की है कि इस घटना में अब तक किसी भी प्रकार की जनहानि या बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की आधिकारिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराने के बजाय सुरक्षा मानकों का पालन करें और आने वाले कुछ समय तक विशेष सतर्कता बरतें।
यह घटना इसलिए भी अधिक चिंताजनक और चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि सिक्किम की धरती पिछले 48 घंटों में तीन बार हिल चुकी है, जो किसी बड़े खतरे का संकेत भी हो सकता है। इससे पहले शुक्रवार के तड़के जब पूरा शहर सो रहा था, तब राजधानी गंगटोक के आसपास दो बार जमीन कांपी थी। आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार सुबह 4:26 बजे 3.6 तीव्रता का पहला झटका लगा, जिसका केंद्र गंगटोक से महज 10.7 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम में जमीन से सिर्फ 5 किलोमीटर की गहराई पर था। इसके कुछ ही देर बाद 2.7 तीव्रता का एक और झटका शहर से 11.2 किलोमीटर पश्चिम में 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। बार-बार आ रहे इन कम तीव्रता के झटकों ने विशेषज्ञों को शोध के लिए मजबूर कर दिया है, क्योंकि उथली गहराई पर आने वाले भूकंप अक्सर अधिक संवेनदनशील होते हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन लगातार प्रभावित इलाकों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। फिलहाल, सिक्किम के पहाड़ों पर सन्नाटा तो है, लेकिन बार-बार आ रहे इन झटकों ने भविष्य की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर बहस को जन्म दे दिया है।
