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केंद्रीय बजट 2026 पर देश की नजरें: निर्मला सीतारमण पेश करेंगी लगातार नौवां बजट

वैश्विक अनिश्चितता के बीच 1 फरवरी को आएगा बजट, टैक्स और निवेश को लेकर बढ़ी उम्मीदें

केंद्रीय बजट 2026 पर देश की नजरें: निर्मला सीतारमण पेश करेंगी लगातार नौवां बजट
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देशभर में केंद्रीय बजट 2026 को लेकर उत्सुकता अपने चरम पर है। रविवार, 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह बजट ऐसे समय आ रहा है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक हालात भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं। ऐसे में यह बजट न केवल घरेलू अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा, बल्कि आने वाले वित्तीय वर्ष में भारत की विकास रणनीति का रोडमैप भी पेश करेगा।

वित्त मंत्री के बजट भाषण से ठीक दो दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण 2026 संसद में पेश किया जा चुका है, जिसने सरकार की आर्थिक सोच की झलक दे दी है। सर्वेक्षण में विकास दर, रोजगार, महंगाई और राजकोषीय संतुलन जैसे प्रमुख संकेतकों पर फोकस किया गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बजट 2026 में सरकार इन आंकड़ों के आधार पर कौन-से ठोस कदम उठाती है और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए किन क्षेत्रों को प्राथमिकता देती है।

निवेशक वर्ग और उद्योग जगत विशेष रूप से वित्त वर्ष 2027 के लिए किए जाने वाले क्षेत्रीय बजट आवंटन पर नजर बनाए हुए हैं। मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप, एमएसएमई और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहन की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही आयकर नीति में संभावित बदलाव, निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाने और विदेशी व्यापार के विविधीकरण को बढ़ावा देने वाले उपायों पर भी बजट से बड़े ऐलान की संभावना तलाशी जा रही है।

बजट के दिन शेयर बाजार खुले रहेंगे और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज तथा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज दोनों ही सामान्य कारोबारी समय पर ट्रेडिंग करेंगे। बाजार सहभागियों के लिए यह दिन बेहद अहम रहने वाला है। हालांकि इस बार निवेशकों की अपेक्षाएं सीमित दिखाई दे रही हैं। जानकारों का कहना है कि बाजार किसी बड़े लोकलुभावन ऐलान की बजाय स्थिर नीतिगत संकेतों की उम्मीद कर रहा है, जिससे निवेश माहौल में भरोसा बना रहे।

विशेषज्ञों के मुताबिक निवेशक मुख्य रूप से पूंजीगत लाभ कर से जुड़ी संभावित राहत पर नजर लगाए हुए हैं। इसके साथ ही बाजार की ओर से सरकार से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि लेनदेन से जुड़े करों में किसी प्रकार की वृद्धि न की जाए। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए निवेशक नीतिगत स्थिरता और कर संरचना में स्पष्टता को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।

कुल मिलाकर केंद्रीय बजट 2026 से देश को संतुलित विकास, वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती की दिशा में ठोस कदमों की उम्मीद है। अब यह देखना अहम होगा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने रिकॉर्ड नौवें बजट में विकास, निवेश और आम करदाता के बीच किस तरह संतुलन साधती हैं।

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