अपने अशुभ काले कारनामों को सफेदी का रंग देने की तैयारी में था कफ सिरप तस्कर

अरबों की तस्करी का आरोपी वाराणसी का शुभम अपने अशुभ कारनामों से माननीय का दर्जा पाने की फिराक में था। परतें खुल रही हैं, लेकिन कई प्रश्न अनुत्तरित हैं।

Cough Syrup Smuggling
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यह कहानी इतनी सीधी नहीं है जितनी ऊपर से दिखती है। अरबों रुपये के नशीले कफ सिरप की तस्करी में आरोपी वाराणसी का शुभम जायसवाल, एक अलग ही सपना देख रहा था। वह अपने आकाओं की तरह खुद को खाकीधारी बनाने की फिराक में था। वह अपने आपको विधान परिषद की कुर्सी तक पहुंचता देख रहा था। हाल ही में एसटीएफ के हत्थे चढ़ा अमित सिंह टाटा भी ब्लॉक प्रमुखी लड़ने की तैयारी में था। नशे के कारोबारियों ने पूर्वांचल भर में जिस तरह ताना-बाना पिरोया था उसको कैश करने से पहले ही शुभम के अशुभ कारनामों का काला चिट्ठा सामने आ गया। उसका इरादा साफ था कि माननीय की कुर्सी उसके लिए ढाल का काम करती।

उसने कुछ बड़े नामों के करीब जाने के लिए लग्जरी लैंड क्रूजर तक खरीद डाली। सोचिए कोई व्यक्ति इतना आगे बढ़कर ऐसे तोहफे क्यों देने लगता है फिर एसटीएफ के बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह का नाम सामने आता है जिसकी कंपनियों की जांच अब तेज है। आलोक लगातार शुभम और अमित सिंह टाटा से संपर्क में था, जांच एजेंसिया इस तिकड़ी के इरादों का पता लगाने में जुटी हैं।

गाजियाबाद पुलिस ने शुभम के लिए लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया है ताकि वह दुबई से किसी और देश की उड़ान न पकड़ सके। अब जांच टीमें इस बात की जांच कर रही हैं कि उसने किन लोगों की मदद से अपना नेटवर्क इतना मजबूत बनाया और कौन लोग उसे बाहर निकलने का रास्ता दिखा रहे थे। उसकी संपत्तियों की भी फेहरिस्त तैयार हो रही है और कई बड़े नाम निशाने पर हैं।


अमित सिंह टाटा एसटीएफ की गिरफ्त में है उसकी संपत्तियों की पड़ताल भी तेजी से चल रही है। उसकी फॉर्च्यूनर के मालिक का पता लगाना भी अब एक अलग ही रहस्य बन गया है जिसकी खोजबीन जारी है। वह फेसटाइम पर शुभम से जुड़े रहने की बात स्वीकार कर चुका है पर असल मकसद क्या था। खबर यह भी है कि शुभम के कुछ रसूखदारों ने उसे दुबई से भारत वापस आने की सलाह दी लेकिन उसने मना कर दिया।

एसटीएफ अब टाटा को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी में है। सहारनपुर से पकड़े गए विभोर राणा और विशाल सिंह दोनों को भी रिमांड पर लिया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि विभोर पहले भी पश्चिम बंगाल में एनसीबी के हत्थे चढ़ चुका है और करीब 200 करोड़ के कफ सिरप की तस्करी में शामिल रहा है।

उधर पूर्व आईपीएस और आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने इस पूरे मामले में पूर्व सांसद की भूमिका की जांच की मांग की है। उन्होंने डीजीपी को लिखे पत्र में कहा है कि जांच सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि जिम्मेदारी तय करते हुए आगे बढ़नी चाहिए खासकर उन अधिकारियों पर जिनकी लापरवाही या साठगांठ से आरोपी दुबई भागे।

इस पूरे घटनाक्रम में एक बात साफ नजर आती है कि यह कोई साधारण तस्करी का मामला नहीं बल्कि उन परछाइयों की कहानी है जो अपराध और सत्ता के बीच कहीं बीचोबीच खड़ी नजर आती हैं। सवाल अभी भी तैर रहे हैं और उनके जवाब शायद आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे लेकर आएं।
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