क्या वाराणसी के आसमान में गूंजने वाली है लड़ाकू विमानों की दहाड़? संगम के बाद अब काशी में बड़ी तैयारी
बाबतपुर एयरपोर्ट पर सेना और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच घंटों चली गुप्त मंत्रणा, एक खास तारीख को लेकर बनी रणनीति।

उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी के आसमान में इस बार कुछ ऐसा होने जा रहा है, जिसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देगी। प्रयागराज में आयोजित शानदार प्रदर्शन के बाद अब भारतीय वायुसेना की नजरें काशी के क्षितिज पर टिकी हैं। हाल ही में बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, हवाईअड्डा प्रशासन और सीआईएसएफ के बीच एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक हुई। इस गोपनीय विचार-विमर्श का मुख्य केंद्र आगामी 8 अक्टूबर की तारीख है, जिसे वायुसेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर स्थान की अंतिम घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जिस तरह से सेना के अधिकारी लगातार बाबतपुर एयरपोर्ट के संपर्क में हैं, उससे यह साफ हो गया है कि इस बार पूर्वांचल के लोगों को घर बैठे ही जांबाज पायलटों का शौर्य देखने को मिल सकता है।
वाराणसी का बाबतपुर हवाईअड्डा इन दिनों अपने विस्तार के दौर से गुजर रहा है। योजना कुछ ऐसी है कि विस्तार के बाद यह पूरे पूर्वांचल का सबसे भव्य और आधुनिक एयर टर्मिनल बन जाए। इसी बदलाव के बीच वायुसेना ने यहां एक भव्य एयर शो आयोजित करने का खाका तैयार किया है। इस प्रस्तावित शो के दौरान करीब ढाई घंटे तक आसमान में भारतीय वायुसेना के घातक लड़ाकू विमान अपनी शक्ति और पराक्रम का प्रदर्शन करेंगे। विमानों की गर्जना और उनके हैरतअंगेज करतबों को देखने के लिए लाखों की भीड़ जुटने की संभावना है। यही वजह है कि सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर पेच फंसा हुआ है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस भारी जनसमूह को संभालने की है, जो इस अद्भुत नजारे को अपनी आंखों से देखने के लिए उमड़ेगा।
बीते बुधवार को हुई इस त्रिपक्षीय बैठक में सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के हर पहलू को बारीकी से परखा गया। सीआईएसएफ और एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान में हवाईअड्डा परिसर इतनी बड़ी भीड़ के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। इसके विकल्प के तौर पर अब ऐसे स्थानों का चयन किया जा रहा है, जहां से लोग बिना किसी अफरा-तफरी के विमानों का प्रदर्शन देख सकें। एयरफोर्स के अधिकारी अब उन जगहों का मुआयना करने में जुटे हैं जो सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती हों। इस शो का उद्देश्य न केवल सेना की ताकत दिखाना है, बल्कि युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित करना भी है।
वाराणसी और आसपास के जिलों के लोग इस खबर के सामने आने के बाद से ही काफी उत्साहित हैं। आमतौर पर ऐसे बड़े आयोजन राजधानी या दिल्ली जैसे बड़े शहरों तक सीमित रहते थे, लेकिन अब काशी के आसमान में राफेल या सुखोई जैसे विमानों की उड़ान की सुगड़ुगाहट ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि जैसे ही सुरक्षा और स्थान से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर आम सहमति बन जाएगी, आयोजन की रूपरेखा सार्वजनिक कर दी जाएगी। फिलहाल, सभी की नजरें 8 अक्टूबर के उस प्रस्तावित कार्यक्रम पर टिकी हैं जो वाराणसी के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।
