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वृंदावन में श्रृंगार घाट के पास क्यों थम गई श्रद्धालुओं की सांसें? यमुना की लहरों के बीच उस भयानक टक्कर की पूरी कहानी

हंसी-खुशी सफर पर निकले लुधियाना के यात्रियों के साथ यमुना के पानी में क्या हुआ? चश्मदीदों और प्रशासन के बयानों ने खड़े किए सवाल।

वृंदावन में श्रृंगार घाट के पास क्यों थम गई श्रद्धालुओं की सांसें? यमुना की लहरों के बीच उस भयानक टक्कर की पूरी कहानी
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मथुरा के वृंदावन में शुक्रवार का दिन एक ऐसी हृदयविदारक स्मृति दे गया, जिसने धर्मनगरी की शांति को पूरी तरह से झकझोर दिया है। श्रृंगार घाट के समीप यमुना नदी में जलविहार कर रहे श्रद्धालुओं के साथ हुई एक अप्रत्याशित घटना ने प्रशासनिक दावों और सुरक्षा मानकों पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, जब करीब 30 से ज्यादा लोग एक स्टीमर पर सवार होकर नदी की लहरों का आनंद ले रहे थे, तभी एक जोरदार टक्कर ने पूरे वातावरण को चीख-पुकार में बदल दिया। देखते ही देखते वह स्टीमर, जिस पर दर्जनों लोग सवार थे, असंतुलित होकर गहरे पानी में समा गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह सब इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने या बचने का मौका तक नहीं मिल सका।


इस हादसे की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो पता चलता है कि स्टीमर पर सवार सभी श्रद्धालु पंजाब के लुधियाना से मथुरा-वृंदावन के दर्शन के लिए आए थे। स्थानीय अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, स्टीमर पानी में अपनी गति से बढ़ रहा था, तभी वह अचानक वहां स्थित पीपों के पुल से टकरा गया। टक्कर की तीव्रता इतनी अधिक थी कि स्टीमर का संतुलन बिगड़ गया और वह पानी में पलट गया। इस दुखद घटना में अब तक 10 लोगों की मृत्यु की पुष्टि की जा चुकी है। राहत एवं बचाव कार्यों के जरिए 20 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, जिनमें से 8 घायल यात्रियों का अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। हालांकि, पांच लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में गोताखोर लगातार नदी की गहराई नाप रहे हैं।


घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों ने बताया कि शोर मचते ही इलाके में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस के साथ एनडीआरएफ की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गईं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस हादसे को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। प्रभावित परिवारों के लिए यह समय अत्यंत कष्टदायी है, क्योंकि वे दर्शन की कामना लेकर यहां पहुंचे थे और अब अपनों की तलाश में बदहवास हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि क्या पीपों के पुल के पास स्टीमर के संचालन के दौरान पर्याप्त सावधानी बरती गई थी या यह सीधे तौर पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी का परिणाम है।

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