Public Khabar

शहर को हरा-भरा बनाने के लिए 'ग्रीनर एंड सेफर बेंगलुरु' कैंपेन का आयोजन

शहर को हरा-भरा बनाने के लिए ग्रीनर एंड सेफर बेंगलुरु कैंपेन का आयोजन
X

शहर को साफ-सुथरा और हरा-भरा बनाने के तहत बेंगलुरु के लोगों ने एक कैंपेन की शुरूआत की है। जिसके तहत रविवार को लोगों ने बड़ी संख्या में एक वॉकथॉन में हिस्सा लिया और कई इलाकों में जाकर शहर को हरा-भरा बनाने का संदेश दिया। इस वॉकथॉन का आयोजन 'ग्रीनर एंड सेफर बेंगलुरु' के तहत किया गया है। वॉकथॉन की शुरूआत इंदिरा नगर में सीवी रमन जनरल हॉस्पिटल के पास से की गई थी।

दिन पर दिन वातावरण में जिस तरह से बदलाव आ रहा है उसका एक बहुत बड़ा कारण है पेड़ों की कमी। इसी कमी को पूरा करने के लिए इस मुहिम की शुरूआत बेंगलुरु के लोगों ने की है। 'ग्रीनर एंड सेफर बेंगलुरु' अभियान का मकसद, लोगों को यह संदेश देना है कि शहर को बचाने के लिए उसे हरा-भरा रखना जरूरी है।

इसी तरह की कई मुहिम देश के कई राज्यों और शहरों में लोगों ने शुरू की है। देश को हरा-भहरा रखने के लिए ऐसा ही एक कदम राजस्थान के डॉ. बीएल चौधरी ने उठाया है। सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय से बॉटनी और बॉयोडीजल में पीएचडी करने के बाद उन्होंने अपना जीवन पर्यावरण के नाम कर दिया। वे नहीं चाहते कि किसी पेड़ की बलि व्यर्थ में चली जाए इसीलिए उन्होंने पेड़ों को शिफ्ट करने का काम शुरू कर दिया। इनमें कई पेड़ तो पचास से सौ साल पुराने हैं। डॉ. चौधरी ने इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए नेशनल हाई वे अथोरिटी को भी प्रस्ताव भेजा है ताकि हाई वे निर्माण में आड़े आने वाले पेड़ों को दूसरी जगह लगाया जा सके। उनका यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो हजारों पेड़ों को कटने से बचाया जा सकेगा।

डॉ. चौधरी का कहना है कि एक पेड़ को लगाने में लंबी मेहनत, बड़े होने में सालों लगते हैं, लेकिन हम अपने स्वार्थ या फिर विकास के नाम पर उन्हें चंद मिनटों में काट देते हैं। इसलिए उन्होंने यह बीड़ा उठाया है कि वह ऐसे पेड़ों को बचाने के लिए काम करेंगे। अभी तक वह एक हजार से अधिक पेड़ों को सुरक्षित जगह पर शिफ्ट कर चुके हैं। अब तो वह चाहे कितने भी साल पुराना पेड़ क्यों ना हो, वे उसे बड़ी आसानी से एस्केवेटर की मदद से एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट कर देते हैं।

Next Story
Share it