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इस वजह से भगवान राम ने राक्षसी ताड़का का वध

इस वजह से भगवान राम ने राक्षसी ताड़का का वध

आप सभी को बता दें कि वाल्मीकि...Editor

आप सभी को बता दें कि वाल्मीकि रामायण के ऐतिहासिक पात्रों में से एक थी 'ताड़का'. जी हाँ, वहीं ताड़का नाम की यह राक्षसी पहले स्वर्ग की अप्सरा हुआ करती थी लेकिन एक श्राप के चलते वह राक्षसी बन गयी जिसकी कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं. आप सभी जानते ही होंगे कि भगवान राम ने राक्षसी ताड़का का वध किया था लेकिन क्यों यह भी आज हम आपको बताते हैं.

कथा - सुकेतु नाम का एक यक्ष था. उसकी कोई भी संतान नहीं थी. इसलिए उसने संतान प्राप्ति की इच्छा से ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की. ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए और उन्होंने संतान प्राप्ति का वरदान दिया. कुछ समय बाद सुकेतु यज्ञ के यहां ताड़का का जन्म हुआ. वरदान स्वरूप ताड़का के शरीर में हजार हाथियों का बल था. तब सुकेतु यक्ष ने उसका विवाह सुंद नाम के दैत्य से किया. लेकिन ताड़का( ताड़का का एक अन्य नाम 'सुकेतुसुता' भी था.) दैत्यों की तरह व्यवहार करने लगी तब अगस्त्य ऋषि के शाप से वह भी राक्षसी हो गयी थी. ताड़का सुकेतु यक्ष की पुत्री थी, जो एक शाप के प्रभाव से राक्षसी बन गई थी. उसका विवाह सुंद नाम के दैत्य से हुआ था. ताड़का के दो पुत्र थे, उनके नाम थे सुबाहु और मारीच.

ताड़का का परिवार अयोध्या के नजदीक एक जंगल में रहता था. ताड़का का परिवार पूरी तरह से राक्षसी प्रवृत्तियों में लिप्त रहता था. वह देवी-देवताओं के लिए यज्ञ करने वाले ऋषि-मुनियों को तंग किया करते थे. सभी ऋषि मुनि ताड़का और उसके दोनों पुत्रों से परेशान थे.जब ये बात सुंद को पता चली तो वो अगस्त्य ऋषि को मारने पहुंचा. तब ऋषि ने सुंद को भस्म कर दिया. जब उसने अपने पति की मृत्यु के लिए अगस्त्य ऋषि से बदला लेना चाहा. ऐसी विषम परिस्थितियों में जब अगस्त्य ऋषि ने विश्वामित्र की सहायता मांगी तब विश्वामित्र के शिष्यों राम और लक्ष्मण ने मिलकर ताड़का का संहार किया था. वहीं जब उन्होंने यह बात ऋषि विश्वामित्र को बताई तो विश्वामित्रअपने दो शिष्यों राम और लक्ष्मण को लेकर यज्ञ भूमि पहुंचे.

अयोध्या के दोनों राजकुमारों ने ताड़का के परिवार का अंत कर दिया. लेकिन मारीच बच निकला और लंका जा पहुंचा. कहा जाता है वह राम से प्रतिशोध लेना चाहता था क्योंकि उसकी मां ताड़का और भाई को श्रीराम ने मार दिया था. सीता-हरण के दौरान मारीच ने ही पर रावण ने मारीच की मायावी बुद्धि की सहायता ली थी. मारीच सीता हरण के दौरान सोने का हिरण बना था. जिसे देखकर ही उसका शिकार करने के लिए उधर भगवान श्रीराम उसके पीछे गए और इधर रावण ने सीता का हरण कर लिया था.

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